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नीट परीक्षा परिणाम: फर्जी दस्तावेजों से धांधली का आरोप लगाने वाले परीक्षार्थियों पर हाई कोर्ट सख्त

Published: Fri, 31 Jul 2026 09:53 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने नीट परीक्षा परिणामों में धांधली के आरोप लगाने वाले परीक्षार्थियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने फर्जी दस्तावेज वाले परीक्षार्थियों पर सख्ती दिखाई।

  2. एनटीए को धांधली में लिप्त छात्रों पर कार्रवाई के निर्देश।

  3. फर्जी ओएमआर शीट, दस्तावेज़ पेश करने पर याचिकाएं खारिज।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। नीट परीक्षा के परिणामों में धांधली को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे मामले दर्ज कराने वाले परीक्षार्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायाधीश अमृता सिन्हा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) चाहे, तो वह धांधली में लिप्त पाए गए इन सभी परीक्षार्थियों के खिलाफ कानून सम्मत सख्त कदम उठा सकती है।

दरअसल, कई छात्रों ने कम अंक देने का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने पर जानकारी सामने आई कि कई मामलों में जाली ओएमआर शीट और फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर याचिका दायर की गई थी। एक छात्र ने तो तीन अलग-अलग परिणाम प्रस्तुत कर अदालत को भ्रमित करने की कोशिश की।

एनटीए के वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित छात्र द्वारा जमा सभी दस्तावेज फर्जी और छेड़छाड़ किए हुए हैं, 2025 का स्कोर कार्ड भी प्रस्तुत किया गया। एनटीए ने ऐसे परीक्षार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत देते हुए तीन साल तक परीक्षा में बैठने पर प्रतिबंध की बात कही है।

एक अन्य मामले में 370 अंकों की गड़बड़ी का दावा भी झूठा पाया गया, जिसके बाद छात्र ने मामला वापस लेने की गुहार लगाई। अदालत ने टिप्पणी की कि 'जाली दस्तावेज देकर न्यायपालिका को भी ठगने की कोशिश की गई है।' सभी याचिकाएं खारिज करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

छात्रों के लिए मुकदमा करने वाले वकील हुए शर्मिंदा

इस पूरे घटनाक्रम के चलते इन याचिकाओं की पैरवी कर रहे वकील भी भारी असमंजस और फजीहत में पड़ गए हैं। वकीलों का कहना है कि जब वे मामले में बहस करने उतरते हैं तो उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। कई वरिष्ठ वकीलों ने इन मामलों से तौबा कर ली है और अब वे अपने जूनियर वकीलों को भेजकर चुपचाप मामले वापस ले रहे हैं।

एक वकील ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी परीक्षा में इस तरह के जाली दस्तावेज पेश किए जाएंगे, यह हमारे लिए अकल्पनीय था। दस्तावेजों की सत्यता जांचना हमारे लिए संभव नहीं होता, जिसके चलते अदालत के समक्ष हमें ही शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है।