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सीएम के आरोप के बाद बुद्धदेव के बचाव में उतरे वाम मोर्चा, औद्योगिक नीति की जिम्मेदारी ज्योति बसु पर डाली

Published: Fri, 06 Nov 2026 04:10 PM (IST)

सीएम शुभेंदु अधिकारी द्वारा वाममोर्चा शासन में भूमि अधिग्रहण पर बुद्धदेव भट्टाचार्य की आलोचना के बाद, विमान बसु ने उनका ...और पढ़ें

वाम मोर्चा के वरिष्ठ नेता विमान बसु (फाइल)।

वाम मोर्चा के वरिष्ठ नेता विमान बसु (फाइल)।

HighLights

  1. शुभेंदु अधिकारी ने वाममोर्चा के भूमि अधिग्रहण पर सवाल उठाए।

  2. विमान बसु ने बुद्धदेव का बचाव करते हुए ज्योति बसु को जिम्मेदार ठहराया।

  3. माकपा के भीतर विमान बसु के बयान पर आंतरिक चर्चा।

राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल की नई उद्योग नीति को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को नई उद्योग नीति की घोषणा के दौरान वाममोर्चा शासन में हुए भूमि अधिग्रहण और खासकर नंदीग्राम की घटना को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य पर निशाना साधा था।

माकपा के भीतर शुरू हुई चर्चा

अब इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वाममोर्चा के चेयरमैन विमान बसु ने बुद्धदेव का बचाव करते हुए औद्योगिक नीति की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के नेतृत्व वाली सरकार पर डाल दी है। उनके इस बयान से माकपा के भीतर भी चर्चा शुरू हो गई है।

ज्योति बसु सरकार की थी जिम्मेदारी

विमान बसु ने एक समाचार माध्यम को दिए साक्षात्कार में कहा कि वाममोर्चा सरकार की औद्योगिक नीति ज्योति बसु के नेतृत्व में स्वीकार और घोषित की गई थी। यदि उस नीति में कोई समस्या थी तो उसकी जिम्मेदारी ज्योति बसु के नेतृत्व वाली सरकार की थी। बुद्धदेव भट्टाचार्य को तो केवल उस नीति को लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

यह है पूरा मामला

दरअसल, गुरुवार को इको पार्क में सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया था कि सात जनवरी, 2007 को बुद्धदेव भट्टाचार्य को स्वीकार करना पड़ा था कि हल्दिया विकास प्राधिकरण के पास भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी करने का कानूनी अधिकार नहीं था। 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत यह अधिकार केवल जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर के पास था।

नदीग्राम का दिया हवाला

मुख्यमंत्री के अनुसार, पार्टी के आंतरिक दबाव में इस निर्देश की अनदेखी का नतीजा 14 मार्च, 2007 को नंदीग्राम की भयावह घटना के रूप में सामने आया।

विमान बसु के बयान पर माकपा के भीतर अलग-अलग चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि उन्होंने अपने पुराने साथी बुद्धदेव को बचाने के लिए ज्योति बसु का उल्लेख किया है।

वहीं, आलोचकों का कहना है कि 2006 में अनिल विश्वास के निधन के बाद पार्टी के राज्य सचिव की जिम्मेदारी विमान बसु के पास भी थी। इसलिए उस दौर की औद्योगिक नीति को लेकर उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, माकपा नेतृत्व ने इस विवाद पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

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