विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बख्तरबंद वाहनों के लिए बनेगा हल्का बुलेटप्रूफ कांच, DRDO और CGCRI की 50 करोड़ की बड़ी परियोजना

Published: Tue, 29 Sep 2026 02:00 AM (IST)

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और सीएसआइआर-केंद्रीय कांच और सिरामिक अनुसंधान संस्थान ने बख्तरबंद वाहनों के लिए स्वदेशी और उन्नत ...और पढ़ें

बख्तरबंद वाहनों के लिए डीआरडीओ और सीजीसीआरआई की 50 करोड़ की परियोजना

बख्तरबंद वाहनों के लिए डीआरडीओ और सीजीसीआरआई की 50 करोड़ की परियोजना

HighLights

  1. डीआरडीओ-सीजीसीआरआई ने बख्तरबंद वाहनों हेतु हल्का बुलेटप्रूफ कांच विकसित किया।

  2. यह 50 करोड़ की परियोजना आयातित कवच को प्रतिस्थापित करेगी।

  3. वजन और मोटाई 50% कम होगी, एके-47 से सुरक्षा।

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बख्तरबंद वाहनों के लिए स्वदेशी और उन्नत हल्की बुलेटप्रूफ कांच तकनीक विकसित करने हेतु सीएसआइआर-केंद्रीय कांच और सिरामिक अनुसंधान संस्थान (सीजीसीआरआई) के साथ हाथ मिलाया है।

50 करोड़ रुपये की इस चार वर्षीय परियोजना में डीआरडीओ की प्रयोगशालाएं - महाराष्ट्र स्थित नवल मटेरियल्स रिसर्च लैबोरेट्री (एनएमआरएल) और चंडीगढ़ स्थित टीबीआरएल भी शामिल हैं।

यह परियोजना वर्तमान में अपने उन्नत चरण में है। इसका मुख्य उद्देश्य आयातित पारदर्शी आर्मर (बुलेटप्रूफ कांच) को स्वदेशी तकनीक से बदलना तथा इसके वजन और मोटाई को 50 प्रतिशत तक कम करना है।

सीजीसीआरआई के निदेशक बिक्रमजीत बसु के अनुसार, यह परियोजना देश की रणनीतिक रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप है। कोलकाता स्थित इस प्रयोगशाला के विज्ञानियों का कहना है कि यह तकनीक बख्तरबंद वाहनों के लिए उन्नत पारदर्शी ग्लास-सिरामिक्स विकसित करने पर केंद्रित है, जो पारंपरिक आर्मर की तुलना में काफी हल्की और पतली होगी, साथ ही कई गोलियों के प्रहार को रोकने में सक्षम होगी।

ग्लास डिवीजन के विज्ञानी अतियार रहमान मोल्ला ने बताया कि इस तकनीक का मुख्य लक्ष्य मजबूत मल्टी-शाट बैलिस्टिक सुरक्षा देना है, जो (बीआईएस V और VI के मानक परीक्षण विधियों के अनुसार) तय रफ्तार से 100 मीटर की दूरी से एके -47 राइफल की गोलीबारी को झेल सके।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)