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क्या ममता बनर्जी की टीएमसी का बदलेगा नाम और निशान? EC के एक्शन के बाद सौंपे तीन नए नाम और सिंबल

Published: Fri, 18 Sep 2026 09:55 AM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 10:32 AM (IST)

चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है। ...और पढ़ें

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी(फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, कोलकाता। आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों में चुनाव आयोग द्वारा टीएमसी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों पर पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी ने गुरुवार रात 11:36 बजे चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश का जवाब सौंपते हुए अपनी पसंद के तीन नाम और चुनाव चिह्न दिए, लेकिन इसे कड़े विरोध के साथ दाखिल किया गया।

क्या है चुनाव आयोग का आदेश?

यह कदम तब सामने आया है जब चुनाव आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुटों के बीच बंटवारे को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया कि कोई भी गुट ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) का नाम या फूल और घास वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

दोनों गुटों को अब अलग-अलग नामों और आयोग द्वारा आवंटित किए गए नए चुनाव चिह्नों के साथ उपचुनाव लड़ने होंगे। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक इस विवाद का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता।

चुनाव आयोग ने कहा कि दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों ने असली पार्टी होने का दावा किया है, जिसके कारण चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत इस पर ठोस फैसला लेने की आवश्यकता है। आयोग ने कहा कि पिछले मामलों और उदाहरणों पर आधारित यह अंतरिम उपाय दोनों पक्षों को बिना किसी पक्षपात के समान स्थिति में रखेगा।

कैसे चुनाव आयोग तक पहुंचा विवाद?

चुनाव आयोग पार्टी के नियंत्रण, उसके नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के दावों और दलीलों पर लगातार सुनवाई कर रहा है। कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने दस्तावेज जमा किए हैं और आयोग के समक्ष पेश भी हुए हैं।

यह पूरा विवाद इस साल जुलाई में चुनाव आयोग तक पहुंचा था, जब प्रतिद्वंद्वी गुटों ने टीएमसी पर नियंत्रण के लिए अपने-अपने दावे पेश किए थे। इसके बाद पैनल ने संगठनात्मक नियंत्रण, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं, पार्टी की संपत्तियों, नाम और चुनाव चिह्न सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्षों से जवाब मांगे थे।

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