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    कौन हैं माखनलाल सरकार? सुवेंदु की शपथ से पहले PM मोदी ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद

    Updated: Sat, 09 May 2026 11:54 AM (IST)

    पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पीएम मोदी ने 98 वर्षीय वयोवृद्ध भाजपा नेता माखनलाल सरकार के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। ...और पढ़ें

    HighLights

    1. पीएम मोदी ने माखनलाल सरकार के चरण स्पर्श किए

    2. शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह का ऐतिहासिक पल

    3. पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली पूर्ण बहुमत सरकार

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी पार्टी के लिए ऐतिहासिक क्षण है। सुवेंदु की शपथ ग्रहण से पहले मंच पर पहुंचते ही पीएम मोदी ने 98 वर्षीय वयोवृद्ध नेता माखनलाल सरकार को देखा और तुरंत उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री ने इस बुजुर्ग नेता को काफी देर तक अपने गले से लगाए रखा।

    बंगाल में भाजपा के इस पहले और ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में पार्टी ने अपने इस समर्पित और संघर्षशील नेता को मंच पर विशेष स्थान देकर सम्मानित किया।

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    कौन हैं माखनलाल सरकार?

    माखनलाल सरकार राष्ट्रवादी विचारधारा और जनसंघ के शुरुआती जमीनी नेताओं में गिने जाते हैं। उनका राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष दशकों पुराना है। साल 1952 में जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने का ऐतिहासिक आंदोलन शुरू किया था।

    तब माखनलाल सरकार कदम से कदम मिलाकर उनके साथ खड़े थे। इस आंदोलन के चलते उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था और उन्होंने अपना समय जेल में बिताया।

    बंगाल में भाजपा को खड़ा करने में रहा अहम योगदान

    साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद उन्हें बंगाल के पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनकी सांगठनिक क्षमता का ही नतीजा था कि महज एक साल के भीतर उन्होंने लगभग 10,000 नए सदस्यों को भाजपा से जोड़ दिया।

    साल 1981 से शुरू करके लगातार सात वर्षों तक उन्होंने पार्टी के जिलाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उस दौर की राजनीति में यह एक बेहद असाधारण उपलब्धि मानी जाती थी, क्योंकि आम तौर पर कोई भी नेता किसी एक संगठनात्मक पद पर दो साल से अधिक समय तक नहीं रह पाता था। आज बंगाल में मिली जीत के पीछे ऐसे ही जमीनी नेताओं के दशकों के संघर्ष की नींव है।

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