रेजीनगर उपचुनाव: RSP उम्मीदवार ने वापस लिया नाम, कहा- चुनाव आयोग ने नहीं दी पारंपरिक सिंबल के इस्तेमाल की इजाजत
पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से RSP उम्मीदवार ने अपना नाम वापस ले लिया है।

RSP उम्मीदवार ने रेजीनगर उपचुनाव से वापस लिया नाम (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
RSP उम्मीदवार ने रेजीनगर उपचुनाव से नाम वापस लिया।
चुनाव आयोग ने पारंपरिक 'कुदाल-फावड़ा' चिह्न नहीं दिया।
पार्टी ने आयोग पर पक्षपात और साजिश का आरोप लगाया।
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में एक नया मोड़ आया है। लेफ्ट फ्रंट की सहयोगी रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने चुनाव से अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले लिया है।
पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने उन्हें उनके पारंपरिक 'कुदाल और फावड़े' (spade and shovel) वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी।
बंगाल उपचुनाव में चुनाव चिह्न को लेकर बवाल
RSP के वरिष्ठ नेता मनोज बंदोपाध्याय ने बताया कि शनिवार को नॉमिनेशन की जांच के बाद पार्टी को सूचित किया गया कि वह उस चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकती जिससे वह पारंपरिक रूप से चुनाव लड़ती रही है और इसके बजाय उसे 'बाल्टी' (bucket) वाले चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना होगा।
मनोज बंदोपाध्याय ने इस मामले पर सोमवार को कहा, 'इसके अलावा और क्या रास्ता है? चुनाव आयोग ने एक छोटी सी तकनीकी खामी का हवाला देते हुए हमें हमारा पारंपरिक चुनाव चिह्न नहीं दिया। इसलिए हमने अपने उम्मीदवार को वापस लेने का फैसला किया है। EVM पर हमारे उम्मीदवार का नाम हो सकता है, लेकिन हम यह उपचुनाव नहीं लड़ रहे हैं।'
मनोज बंदोपाध्याय ने बताया, 'इस घटनाक्रम के कारण पार्टी को अपने उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा को वापस लेना पड़ा, जिन्होंने पहले ही प्रचार शुरू कर दिया था।'
RSP के लिए, चुनाव चिह्न को लेकर विवाद का महत्व केवल चुनावी उपयोगिता से कहीं अधिक है; पार्टी का कहना है कि 'कुदाल और फावड़ा' उसके राजनीतिक संघर्षों और संगठनात्मक इतिहास से गहराई से जुड़े रहे हैं।
पक्षपात का लगाया आरोप
RSP के राज्य सचिव तपन होरे ने अधिकारियों पर चुनाव चिह्न आवंटन में साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर भी पक्षपात के आरोप लगाए।
तपन होरे ने कहा कि पार्टी वकीलों से सलाह ले रही है और इस मुद्दे पर अदालत जाने पर विचार करेगी। RSP के लिए, चुनाव चिह्न को लेकर विवाद का महत्व केवल चुनावी उपयोगिता से कहीं अधिक है।
रेजीनगर उपचुनाव
रेजीनगर सीट को लेकर मुकाबला शुरू से ही विवादित रहा है। RSP इस सीट पर दावा कर रही थी, जबकि फ्रंट की प्रमुख सहयोगी पार्टी CPI(M) ने अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया था।
इसके बाद RSP ने मिश्रा को बागी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा, जिससे विपक्ष के लिए पहले से ही मुश्किल मुकाबला दो वामपंथी पार्टियों के बीच की लड़ाई में बदल गया।
अब RSP के हट जाने के बाद, CPI(M) ही लेफ्ट फ्रंट की एकमात्र पार्टी बची है जो औपचारिक रूप से इस सीट पर चुनाव लड़ रही है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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