विश्वसनीय सांख्यिकीय प्रणाली आज भी नीति निर्माण की रीढ़ : सांख्यिकी महानिदेशक
कोलकाता में 20वें सांख्यिकी दिवस पर महानिदेशक के. मनाओ सिंह ने नीति निर्माण में विश्वसनीय आंकड़ों और मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली को महत्वपूर्ण बताया। ...और पढ़ें

20वें सांख्यिकी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सांख्यिकी महानिदेशालय के महानिदेशक व अन्य वरिष्ठ अधिकारी।
HighLights
नीति निर्माण में विश्वसनीय आंकड़े और मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली अहम।
प्रशासनिक आंकड़ों की क्षमता उजागर करने पर 20वें सांख्यिकी दिवस का जोर।
आंकड़ों की गुणवत्ता, मानकीकरण और गोपनीयता प्रमुख चुनौतियां हैं।
राजीव कुमार झा, कोलकाता। नीति निर्माण में विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका आज भी सबसे अहम है और मजबूत सांख्यिकीय व्यवस्था किसी भी प्रभावी शासन प्रणाली की आधारशिला होती है। यह बात वाणिज्यिक खुफिया एवं सांख्यिकी महानिदेशालय के महानिदेशक के. मनाओ सिंह ने कोलकाता में आयोजित 20वें सांख्यिकी दिवस कार्यक्रम में कही।
भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा कोलकाता स्थित भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि पारंपरिक सर्वेक्षण आधारित आंकड़े आज भी आधिकारिक सांख्यिकी की मुख्य धुरी हैं, लेकिन प्रशासनिक आंकड़े तेजी से नीति निर्धारण के लिए उपयोगी पूरक स्रोत के रूप में उभर रहे हैं।
आधुनिक भारतीय सांख्यिकी प्रणाली के जनक माने जाने वाले प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था- प्रशासनिक आंकड़ों की क्षमता को उजागर करना। सिंह ने इस दौरान प्रोफेसर महालनोबिस के योगदान को याद किया। कार्यक्रम में भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के निदेशक एम. शशि कुमार ने कहा कि डिजिटल प्रशासन के दौर में बेहतर नीति निर्माण के लिए विभिन्न आंकड़ा स्रोतों के एकीकरण और संस्थागत समन्वय को मजबूत करना जरूरी है।
तकनीकी सत्र में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के उप निदेशक अरको मंडल ने कहा कि प्रशासनिक आंकड़ों के बेहतर उपयोग से सर्वेक्षण का बोझ कम होगा, आंकड़ों के प्रकाशन में तेजी आएगी और सरकारी नीतियों का मूल्यांकन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। हालांकि उन्होंने आंकड़ों की गुणवत्ता, मानकीकरण, व्यापक पहुंच और गोपनीयता जैसी चुनौतियों को भी रेखांकित किया।
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वहीं उद्यम सर्वेक्षण प्रभाग की निदेशक श्रेया सेनगुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के कई प्रमुख सर्वेक्षणों में प्रशासनिक आंकड़ों के इस्तेमाल से विश्वसनीयता और सांख्यिकीय दक्षता बढ़ रही है। विशेष व्याख्यान में भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के पूर्व निदेशक और पद्मश्री से सम्मानित डा बिमल राय ने कहा कि प्रोफेसर महालनोबिस ने देश की योजना निर्माण प्रक्रिया में आंकड़ों का प्रभावी इस्तेमाल कर विकास की मजबूत नींव रखी थी।
उन्होंने कहा कि भविष्य में वैज्ञानिक मानकों, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ आधिकारिक सांख्यिकी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के उद्यम सर्वेक्षण प्रभाग के उप महानिदेशक संजीब बसु ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रोफेसर महालनोबिस को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिसके बाद दीप प्रज्वलन कर ज्ञान और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।