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आसमान पर पहुंचे चीनी के दाम, बताशा और नकुलदाना भी महंगा... बंगाल में लोग परेशान

Updated: Fri, 21 Aug 2026 05:09 PM (GMT+05:30)

बंगाल में खुदरा चीनी के दाम बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं, जिससे कारोबारी वर्ग और आम लोग चिंतित हैं।

चीनी के दाम में भारी उछाल (प्रतीकात्मक फोटो)

चीनी के दाम में भारी उछाल (प्रतीकात्मक फोटो)

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। देश के विभिन्न राज्यों की तरह बंगाल में भी खुदरा बाजार में चीनी के दाम बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं।

कारोबारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में चीनी के दाम में 20 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले चार-पांच दिन में ही कीमतों में अचानक 10 प्रतिशत का उछाल आया है। इस वृद्धि से कारोबारी वर्ग से लेकर आम लोग चिंतित हैं।

महंगी हो रही चीनी

कीमतों में उछाल के चलते चीनी से बने उत्पादों जैसे बताशा और नकुलदाना आदि के दाम में भी इसी तरह की बढ़ोतरी हुई है। कारोबारियों ने कहा कि केंद्र सरकार ने गुरुवार शाम चीनी मिलों को 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने की अनुमति दी है।

करीब एक दशक बाद इस तरह का कदम उठाया गया है, लेकिन इसका असर अभी खुदरा बाजारों तक नहीं पहुंचा है।

कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर केंद्र सरकार ने उन थोक खरीदारों पर भी भंडार सीमा लगा दी है जो महीने में 10 टन से अधिक चीनी की खपत करते हैं। उनके पास 15 दिन की खपत के बराबर ही चीनी का भंडार रखने की सीमा तय की गई है।

कन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशन (सीडब्ल्यूबीटीए) के अध्यक्ष सुशील पोद्दार ने कहा कि चीनी मिलों पर कोई नियंत्रण नहीं है और थोक कीमतें पहले ही 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।

एक स्थानीय किराना दुकान के मालिक ने कहा कि मैंने सिर्फ तीन दिन पहले खुली चीनी 65 रुपये किलोग्राम बेची पर थी लेकिन आज मैं इसे 70 रुपये किलोग्राम से कम में नहीं बेच सकता।

पोद्दार ने कहा कि चीनी मिलों पर कोई नियंत्रण नहीं है। थोक कीमतें पहले ही बढ़कर 65 रुपये किलोग्राम हो गई हैं और खुदरा कीमतें करीब 70 रुपये किलोग्राम तक पहुंच जाएंगी।

एथनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ना इसकी प्रमुख वजहों में से एक है। इसके अलावा, पेट्रोलियम पदार्थों में एथनाल का अधिक मात्रा में मिश्रण से कथित तौर पर वाहनों के इंजनों को भी नुकसान पहुंचने की लगातार खबरें सामने आ रही है।

हालांकि केंद्र स्पष्ट कर चुका है कि एथनॉल मिश्रित इंधनों के इस्तेमाल से वाहनों को कोई नुकसान नहीं पहुंच रहा है। वहीं, एक स्थानीय किराना दुकानदार ने कहा कि सितंबर से नवंबर के बीच त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी चिंता का विषय है।

सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देना कीमतों में वृद्धि रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होगा और अधिक हस्तक्षेप की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 10 लाख टन चीनी देश की करीब दो सप्ताह की मांग के बराबर ही है।

दूसरी ओर, बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनाल मिश्रण को नहीं बल्कि जमाखोरी को जिम्मेदार ठहराया।

हालांकि, एक प्रमुख चीनी मिल कंपनी के अधिकारी ने कहा कि चीनी की पेराई अप्रैल में खत्म हो गई थी और मिलें अब केवल अपने भंडार से चीनी जारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस समय मिलें इससे अधिक कुछ नहीं कर सकतीं।

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