बंगाल में 'सरप्राइज' पर भारी सुवेंदु का 'स्ट्रॉन्ग फैक्टर', क्या होगा सीएम सिलेक्शन का पैटर्न?
बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सुवेंदु अधिकारी एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं। ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री पद के लिए सुवेंदु अधिकारी मजबूत दावेदार। (पीटीआई)
HighLights
सुवेंदु अधिकारी बंगाल में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार।
नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर बने जनादेश का केंद्रीय चेहरा।
भाजपा की नई सरकार में स्थिरता और आक्रामकता का प्रतीक।
जयकृष्ण वाजपेयी, कोलकाता। बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस बना हुआ है।
आमतौर पर भाजपा अपने फैसलों से चौंकाने के लिए जानी जाती है-चाहे वह योगी आदित्यनाथ हों, मोहन यादव, भजनलाल शर्मा, मोहन चरण माझी या विष्णुदेव साय। लेकिन बंगाल की तस्वीर इस स्थापित पैटर्न से अलग नजर आ रही है।
यहां 'सरप्राइज' से ज्यादा 'स्ट्रॉन्ग फैक्टर' हावी दिख रहा है, और वह है सुवेंदु अधिकारी। 34 वर्षों के वाम शासन के बाद सत्ता में आई ममता बनर्जी को उनके गढ़ में चुनौती देना और नंदीग्राम से लेकर भवानीपुर तक सीधे मुकाबले में हराना सुवेंदु को इस जनादेश का केंद्रीय चेहरा बना देता है। यह सिर्फ जीत नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश है।
संकेत साफ : प्रचार से परिणाम तक एक ही चेहरा
चुनाव बाद प्रकाशित 'आभार विज्ञापनों' में प्रधानमंत्री, केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेताओं के साथ सुवेंदु अधिकारी की प्रमुख मौजूदगी को महज संयोग नहीं माना जा रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह उन्हें ममता बनर्जी के विकल्प के रूप में स्थापित करने का संकेत है। चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय नेतृत्व, खासकर अमित शाह का उन्हें लगातार प्रमुखता देना भी इस धारणा को मजबूत करता है कि पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता अब पूर्ण है।
आखिर सुवेंदु ही क्यों?
बंगाल में भाजपा का संगठन अभी भी विस्तार के दौर में है। ऐसे में पार्टी को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है, जो न केवल जनाधार रखता हो बल्कि तृणमूल के मजबूत राजनीतिक ढांचे को सीधे चुनौती दे सके।
पिछले पांच वर्षों में सड़क से लेकर विधानसभा तक सुवेंदु की आक्रामक भूमिका, उनके खिलाफ कई कानूनी मामलों और विधानसभा से निलंबन की घटनाएं-ये सभी उनकी राजनीतिक शैली को परिभाषित करते हैं, जिसे इस जनादेश ने समर्थन दिया है।
अंतिम फैसला भले ही दिल्ली में हो, लेकिन बंगाल की राजनीति में इस वक्त एक ही नाम सबसे स्पष्ट रूप से उभर रहा है-'ममता को हराने वाला ही ममता की कुर्सी का सबसे बड़ा दावेदार है।'
रणनीति का सवाल : प्रयोग नहीं, स्थिरता की जरूरत
भाजपा के लिए यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राजनीतिक निवेश है। ऐसे में नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी जरूरत है-स्थिरता, आक्रामकता और संगठनात्मक पकड़। इन तीनों कसौटियों पर सुवेंदु अधिकारी फिलहाल सबसे आगे नजर आते हैं।
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हालांकि, अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है और पार्टी परंपरा के अनुसार आखिरी पल तक विकल्प खुले रख सकती है।
नंदीग्राम से भवानीपुर : सत्ता के केंद्र की ओर संकेत
नंदीग्राम में बुधवार को उमड़ी भीड़ के बीच सुवेंदु का यह कहना कि उन्हें एक सीट छोड़नी होगी, राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ गया है। संकेत साफ है-वे सत्ता के केंद्र कोलकाता, खासकर भवानीपुर की ओर बढ़ सकते हैं। नंदीग्राम ने उन्हें 'जायंट किलर' बनाया, लेकिन भवानीपुर उन्हें सत्ता का स्वाभाविक दावेदार बना रहा है।