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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 21, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    West Bengal: 'पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल की जाए 87 जातियां', NCBC ने राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

    By Jagran NewsEdited By: Mohammad Sameer
    Updated: Sat, 21 Oct 2023 06:45 AM (IST)

    पिछड़ा वर्ग आयोग ने बंगाल में आबादी के विपरीत पिछड़े वर्गों की राज्य सूची में मुस्लिम जातियों को अधिक संख्या में अधिसूचित किए जाने का संज्ञान लिया है ...और पढ़ें

    पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल की जाए 87 जातियां, बंगाल को नोटिस (file photo)
    पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल की जाए 87 जातियां, बंगाल को नोटिस (file photo)

    HighLights

    1. हंसराज गंगाराम अहीर तीन नवंबर को सुनवाई करेंगे
    2. NCBC ने ओबीसी जातियों के अधिकारों की सुरक्षा को भी गंभीरता से लिया

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने बंगाल की 87 जातियों को केंद्रीय पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल करने के लिये राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष, हंसराज गंगाराम अहीर तीन नवंबर को सुनवाई करेंगे।

    फरवरी 2023 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की कोलकाता में हुई समीक्षा बैठक में राज्य सरकार ने लिखित में बताया कि राज्य की सूची में शामिल 179 ओबीसी जातियों में से 118 मुस्लिम ओबीसी जातियां एवं मात्र 61 हिन्दू ओबीसी जातियां हैं।

    ओबीसी जातियों के अधिकारों की सुरक्षा को भी गंभीरता से लिया

    राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने बंगाल में आबादी के विपरीत पिछड़े वर्गों की राज्य सूची में मुस्लिम जातियों को अधिक संख्या में अधिसूचित किए जाने का संज्ञान लिया है और आयोग ने बंगाल में मूल ओबीसी जातियों के अधिकारों की सुरक्षा को भी गंभीरता से लिया है। इसी को ध्यान में रखते हुए बंगाल सरकार द्वारा प्रस्तावित 87 नई जातियां हैं, जिनमें 78 मुस्लिम एवं मात्र 9 हिन्दू जातियां शामिल हैं।

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    इनकी समीक्षा का निर्णय आयोग ने लिया है एवं बंगाल सरकार से अन्य दस्तावेजों के अलावा राज्य की सूची में शामिल 87 ओबीसी जातियों का इम्पेरियल गजेटियर में वर्णन और वंशावली के साथ उन सभी जातियों का गजेटियर और वंशावली उपलब्ध कराने को कहा है, जो पहले हिंदू थे एवं बाद में धर्मांतरण के बाद मुस्लिम बने हैं। बंगाल सरकार की तरफ से इस संदर्भ में अभी तक राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है।

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