नई सरकार, नया संतुलन! बंगाल कैबिनेट में दिखा बड़ा सामाजिक समीकरण
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के तीन हफ्ते बाद मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल का आज विस्तार हो गया है। कोलकाता के नबन्ना में भाजपा के 3 ...और पढ़ें
HighLights
मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल का विस्तार।
कोलकाता में 35 भाजपा विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ।
मंत्रिपरिषद की संख्या बढ़कर 41 हुई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार बनाने के तीन हफ्ते बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। आज सुबह 11 बजे से कोलकाता के नबन्ना में भाजपा के 35 विधायकों को राज्यपाल आरएन रवि ने मंत्री पद की शपथ दिलाई।
इस विस्तार से मंत्रिमंडल का आकार बढ़ गया, जिसमें अभी अधिकारी और 9 मई को शपथ लेने वाले उनके पांच कैबिनेट सहयोगी शामिल हैं। शुभेंदु कैबिनेट में अब 13 कैबिनेट मंत्री, 19 राज्य मंत्री और 3 स्वतंत्र प्रभार मंत्री हो गए हैं।
कौन बना कैबिनेट मंत्री?
पश्चिम बंगाल में इस बार मंत्रिमंडल में क्षेत्र और अनुभव को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। कैबिनेट में इस बार अनुभवी और युवा नेताओं को जगह दी गई।
जिन 13 चेहरों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है उनमें
- दीपक बर्मन
- तापस रॉय
- डॉ शंकर घोष
- मनोज कुमार उरांव
- अर्जुन सिंह
- गौरी शंकर घोष
- स्वपन दासगुप्ता
- जगन्नाथ चट्टोपाध्याय
- कल्याण चक्रवर्ती
- अजय पोद्दार
- सारद्वत मुखर्जी
- दूध कुमार मंडल
- अनूप कुमार दास
मंत्रिपरिषद कितनी बड़ी होगी?
35 नए मंत्रियों के शामिल होने के साथ ही पश्चिम बंगाल मंत्रिपरिषद की संख्या बढ़कर 41 हो गई। पांच कैबिनेट मंत्री पहले ही शपथ ले चुके हैं, जो महिलाओं (अग्निमित्रा पॉल), मतुआ समुदाय (अशोक कीर्तनिया), राजबंशी समुदाय (निसिथ प्रमाणिक) और आदिवासियों (क्षुदीराम टुडू) का प्रतिनिधित्व करते हैं। पार्टी नेताओं ने बताया कि मंत्रिपरिषद के विस्तार से अन्य समुदायों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा।
91वें संवैधानिक संशोधन के तहत किसी भी राज्य की कैबिनेट का आकार विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यों वाली विधानसभा में मंत्रियों की अधिकतम अनुमत संख्या 44 है। इस हिसाब से अधिकारी सरकार के पास अभी भी इस सीमा से तीन पद कम हैं।
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कैबिनेट विस्तार के जरिए भाजपा का क्या लक्ष्य है?
कैबिनेट विस्तार में व्यापक सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया है। मौजूदा मंत्रिमंडल में पहले से ही महिलाओं, आदिवासियों, मतुआ और राजबंशी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता शामिल हैं।