मालदा हिंसा पर आयोग का बड़ा एक्शन, डीजी से लेकर एसपी तक को फटकार, CBI जांच की लटकी तलवार
केंद्रीय चुनाव आयोग ने मालदा के कालियाचक में हुई हिंसा और जजों को बंधक बनाने की घटना पर सख्त रुख अपनाया है। ...और पढ़ें
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मालदा हिंसा(फोटो: एएनआई)
HighLights
चुनाव आयोग ने मालदा हिंसा पर डीजीपी-एसपी को फटकारा
जजों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच सुझाई
आयोग ने कानून-व्यवस्था में सुधार हेतु अंतिम चेतावनी दी
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बांग्लादेश की सीमा से सटे मालदा जिले के कालियाचक में हुई हिंसा और जजों को बंधक बनाए जाने की घटना पर केंद्रीय चुनाव आयोग ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्धनाथ गुप्त और मालदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अनुपम सिंह को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि गुरुवार रात 12 बजे तक सभी दोषियों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया जाए। आयोग ने साफ कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों की क्लास: 'क्या ट्रेनिंग की जरूरत है?'
गुरुवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल, मुख्य सचिव दुष्यंत नारिवाला और पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
मालदा एसपी के यह कहने पर कि घटनास्थल पर एडिशनल एसपी गए थे, ज्ञानेश कुमार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि तो फिर उन्हें एडीजी बना दिया जाना चाहिए। वहीं, कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अजय नंदा को टोकते हुए उन्होंने सवाल किया कि एक आइपीएस अधिकारी होकर आप कोलकाता नहीं संभाल पा रहे? क्या आपको ट्रेनिंग देने की जरूरत है?
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सीबीआइ जांच के संकेत
दरअसल, मतदाता सूची से नाम कटने के विरोध में मालदा के मोथाबाड़ी और सुजापुर में जबरदस्त हिंसा हुई थी। इस दौरान एसआइआर कार्य में लगे सात जजों को कालियाचक-2 ब्लाक कार्यालय में घंटों बंधक बनाकर रखा गया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की बेंच ने राज्य प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई।
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शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआइ या एनआइए से कराई जाए। साथ ही, न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों को तत्काल पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया।
सीईओ दफ्तर के बाहर जमावड़े पर नाराजगी
आयोग ने केवल मालदा ही नहीं, बल्कि कोलकाता में सीईओ कार्यालय के बाहर दो दिनों से चल रहे हंगामे और भवानीपुर में सुवेंदु अधिकारी के नामांकन के दौरान हुई अशांति पर भी सवाल उठाए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने पूछा कि धारा 163(पूर्ववर्ती 144) के बावजूद इतनी भीड़ कैसे जमा हो रही है? बैठक में मुख्य सचिव को अलग से तलब किया गया है ताकि राज्य की कानून-व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट ली जा सके।
अल्टीमेटम और सुरक्षा के निर्देश
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह पुलिस प्रशासन के लिए एक आखिरी मौका है। मालदा कांड के दोषियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ राज्य भर में चुनावी ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। आयोग अब सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था की निगरानी कर रहा है ताकि मतदान से पहले स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।