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करम महोत्सव में पहुंचे सीएम शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान: UCC के दायरे से बाहर रहेगा कुड़मी समाज

By Dilip KumarEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Sun, 20 Sep 2026 03:42 PM (IST)

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में करम महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि कुड़मी समाज को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

आदिवासी कुड़मी समाज का कार्यक्रम को संबंधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी

आदिवासी कुड़मी समाज का कार्यक्रम को संबंधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी

HighLights

  1. पुरुलिया में आयोजित करम महोत्सव में उमड़ा ऐतिहासिक जनसैलाब।

  2. कुड़माली भाषा और एसटी दर्जे की मांगों पर भी हुई चर्चा।

जाटी, पुरुलिया/बलरामपुर। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला अंतर्गत टामना थाना क्षेत्र के कड़ाडी फुटबॉल मैदान में रविवार को करम परबतिया महाजुड़ुआहि (करम महोत्सव) का आयोजन हुआ। 
 
इसइसमें कुड़मी समाज का ऐतिहासिक जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस विशाल सामाजिक और सांस्कृतिक महासमागम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
 
मुख्यमंत्री के आगमन से पूर्व ही कड़ाडी मैदान समर्थकों और कुड़मी समाज के श्रद्धालुओं से खचाखच भर चुका था। भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। 
 

पारंपरिक वेशभूषा, धामसा-मादल और 40 हजार कलाकारों की प्रस्तुति 

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लोग छाते लेकर और बारिश में भीगते हुए भी कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे। पीले रंग के पारंपरिक परिधानों में सजे महिला-पुरुषों ने प्रकृति के इस पर्व पर सामूहिक करम नृत्य और लोकगीत प्रस्तुत किए। 

कड़ाडी मैदान दिनभर धामसा और मादल की गूंज से सराबोर रहा। आयोजन स्थल पर बनाए गए विशाल पंडाल में लगातार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां चलती रहीं। 
 
इस आयोजन में केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों झारखंड, ओडिशा और असम से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कुड़मी समाज के लगभग 40 हजार सांस्कृतिक दलों ने मंच पर अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
 
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेशवासियों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं और इसे प्रकृति व सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग बताया। 
 
उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर है जब राज्य का कोई मुख्यमंत्री कुड़मी समाज के इतने बड़े करम उत्सव में शामिल हुआ है।
 
मंच से मुख्यमंत्री ने ऐलान करते हुए कहा कि आदिवासी कुड़मी समाज के मूल मानता (प्रधान) अजीत प्रसाद महतो ने मुझसे अनुरोध किया था कि कुड़मी समाज को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से बाहर रखा जाए। 
 
उनके इस अनुरोध पर गंभीरता से विचार करते हुए राज्य सरकार ने कुड़मी समाज को UCC के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया है।"
 

भाषा और ST दर्जे की मांगों पर सरकार का रुख 

पिछली सरकारों पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने कुड़मी समाज को केवल झूठे आश्वासन दिए, लेकिन वर्तमान सरकार अपने हर वादे को पूरा करेगी।
 
कुड़माली भाषा: उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव पूर्व कुड़माली और राजबंशी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने का आश्वासन दिया था। पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने इस मुद्दे को संसद में उठाया है और इस पर सकारात्मक प्रक्रिया जारी है।
 
मुकदमों की वापसी व अन्य मांगें: मुख्यमंत्री ने अजीत प्रसाद महतो को पुरुलिया जिले की समस्याओं पर विचार-विमर्श के लिए अपने कार्यालय में आमंत्रित किया।
 
उन्होंने आश्वासन दिया कि समाज के आंदोलनकारियों पर दर्ज पुराने मुकदमों को वापस लेने की दिशा में भी सरकार काम करेगी।
 

स्वयंसेवकों ने संभाली कमान, राजनीतिक रूप से भी अहम रहा मंच

विशाल जनसमूह को देखते हुए आयोजकों और स्वयंसेवकों ने सुरक्षा व व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। माइक के जरिए लोगों को निर्धारित कतारों में बैठने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की जाती रही।
 
कार्यक्रम में उठे फंडिंग के सवालों को खारिज करते हुए कुड़मी समाज के मूल मानता अजीत प्रसाद महतो ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का प्रायोजित कार्यक्रम नहीं है। 
 
समाज के लोगों ने घर के मवेशी बेचकर और आपसी चंदा इकट्ठा करके इस आयोजन को सफल बनाया है। इसमें झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो, पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, पुरुलिया जिले के सभी 9 भाजपा विधायक समेत समाज के कई प्रमुख बुद्धिजीवी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। 
 
यह आयोजन न केवल कुड़मी समाज की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना, बल्कि अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे और अपनी सामाजिक मांगों को लेकर समाज की एकजुटता का भी बड़ा प्रदर्शन साबित हुआ।

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