विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अब्दुल अल-सैयद ने रचा इतिहास, अमेरिकी सीनेट पहुंचने वाले पहले मुस्लिम सांसद बने; भारत से है कनेक्शन

Published: Wed, 04 Nov 2026 01:11 PM (IST)

अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन में अमेरिकी सीनेट सीट जीतकर इतिहास रच दिया है, वे अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं।

अब्दुल अल-सैयद बने अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर (फोटो-रॉयटर्स)

अब्दुल अल-सैयद बने अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. अब्दुल अल-सैयद मिशिगन से पहले मुस्लिम अमेरिकी सीनेटर चुने गए।

  2. अल-सैयद ने रिपब्लिकन नेता माइक रोजर्स को चुनाव में हराया।

  3. अल-सैयद की पत्नी का भारत से गहरा जुड़ाव।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। डेमोक्रेट्स के उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन में अमेरिकी सीनेट सीट की दौड़ में रिपब्लिकन नेता माइक रोजर्स को हरा दिया है।

अब्दुल अल-सैयद के लिए यह बहुत बड़ी जीत है, क्योंकि ये चुनाव जीतकर वे अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं।

अब्दुल अल-सैयद का भारत से भी गहरा नाता है। एक इंटरव्यू में अल-सैयद ने कहा था, 'देखिए, मेरी शादी एक दक्षिण भारतीय परिवार में हुई है और मुझे 20 साल हो चुके हैं। अब मैं पूरी तरह से इसमें घुल-मिल गया हूं।'

अल-सैयद ने आगे कहा, 'सच कहूं तो, शायद मैं अरब होने से ज्यादा भारतीय हूं। हालांकि परिवार की जड़ें भटकल में हैं, लेकिन इसके ज्यादातर सदस्य अब बेंगलुरु में बस गए हैं। वहीं, सारा का नजदीकी परिवार मुख्य रूप से अमेरिका में ही रह रहा है।'

US मिडटर्म चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अब्दुल अल-सैयद का कड़ा विरोध किया था और उन्हें 'जिहादी' कहा था।

अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बने अब्दुल अल-सैयद

अल-सैयद ने 'यूनिवर्सल हेल्थकेयर' (सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा) और सरकारी जवाबदेही के एजेंडे पर अपना चुनाव प्रचार किया था। उन्होंने देश के प्रमुख राजनीतिक रणक्षेत्रों में से एक, मिशिगन में हुए इस कड़े मुकाबले में जीत हासिल की।

मिशिगन की इस चुनावी दौड़ ने पूरे देश का ध्यान खींचा था, क्योंकि डेमोक्रेट्स सीनेट पर फिर से अपना नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।

अब्दुल अल-सैयद का भारत से कनेक्शन

अब्दुल अल-सैयद की जीत का तटीय कर्नाटक से एक निजी जुड़ाव भी है। यह जुड़ाव उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू के जरिए है, जो एक मनोचिकित्सक हैं। अल-सैयद की पत्नी का परिवार भटकल से ताल्लुक रखता है, जो मंगलुरु से लगभग 140 किलोमीटर दूर है।

सारा, जुकाकू शमसुद्दीन की पोती हैं। शमसुद्दीन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.डी. जत्ती के नेतृत्व वाली मैसूर रियासत में वित्त उप-मंत्री के रूप में काम किया था।

रोड्स स्कॉलर रहे अल-सैयद की मुलाकात सारा से तब हुई थी, जब वे दोनों मिशिगन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने सारा के दक्षिण भारतीय परिवार और संस्कृति के साथ अपने जुड़ाव के बारे में भी बताया।

जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर जोर

अल-सैयद के लिए, यह जीत उस राजनीतिक सफर का एक अहम पड़ाव है, जिसकी शुरुआत चिकित्सा (मेडिसिन) के क्षेत्र से हुई थी। उनकी चुनाव प्रचार वेबसाइट के मुताबिक, उन्होंने शुरुआत में डॉक्टर बनने के लिए प्रशिक्षण लिया था, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि राजनीतिक व्यवस्था की कमियां ही लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही हैं।

इसके बाद उन्होंने जन स्वास्थ्य और सरकारी प्रशासन के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। उन्होंने 'वेन काउंटी डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ, ह्यूमन एंड वेटरन्स सर्विसेज' के निदेशक के रूप में भी काम किया है।

उनके चुनाव प्रचार का मुख्य जोर इस बात पर था कि स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और सरकार को अमीर लोगों या बड़ी कंपनियों के बजाय आम अमेरिकी नागरिकों के लिए काम करना चाहिए।

ट्रंप ने कहा था 'जिहादी'

ट्रंप ने चुनावी रैली के दौरान अपने भाषण में कहा था, 'तो अब्दुल... यह भी चाहता है कि हमारे देश में शरिया कानून लागू हो जाए। अगर वह कभी ऐसा करने में कामयाब हो जाता है, तो सबसे पहले उसी पर मुकदमा चलना चाहिए। और मैं इसका गवाह बनूंगा।'

ट्रम्प ने आगे कहा था, 'मैं यहां इसलिए आया हूं ताकि मुस्लिम ब्रदरहुड के एक जिहादी सदस्य को संयुक्त राज्य अमेरिका का सीनेटर बनने से रोक सकूं।'

यह भी पढ़ें- अमेरिका में पिया डांडिया ने रचा इतिहास, फ्लोरिडा से संसद पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बनीं

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।