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क्या है Apple की 'सीक्रेट वर्ड ग्रे-लिस्ट? जिसमें पीएम मोदी, राहुल गांधी और ट्रंप भी शामिल

Published: Fri, 06 Nov 2026 10:56 PM (IST)

एक रिसर्चर ने एप्पल के iOS कीबोर्ड में एक गुप्त बहुभाषी लिस्ट का खुलासा किया है, जिसमें हजारों शब्द और ...और पढ़ें

रिसर्चर ने आईओएस कीबोर्ड की सीक्रेट वर्ड लिस्ट।

रिसर्चर ने आईओएस कीबोर्ड की सीक्रेट वर्ड लिस्ट।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आपके iPhone का कीबोर्ड आपको कुछ शब्द कभी सुझाता ही नहीं! एक रिसर्चर ने एप्पल के iOS कीबोर्ड में छिपी एक गुप्त बहुभाषी लिस्ट का खुलासा किया है, जिसमें हजारों शब्द और वाक्यांश शामिल हैं।

ऑटो-कम्प्लीट और स्वाइप-टाइपिंग के जरिए ये शब्द कभी स्क्रीन पर नहीं आते। इस रहस्यमयी लिस्ट को खोजने वाले रिसर्चर डेरेक कॉफमैन ने इसे सेंसरशिप का एक बहुत ही हल्का रूप बताया है। लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि एप्पल जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर एक छोटा सा कदम भी बहुत बड़ा असर डाल सकता है।'

इस लिस्ट का मतलब कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं है। आईफोन यूजर अभी भी अपने ईमेल और मैसेज में इन शब्दों या वाक्यांशों को खुद टाइप कर सकते हैं। इस पाबंदी का सीधा सा मतलब यह है कि ज्यादातर मामलों में, कीबोर्ड 'प्रिडिक्टिव टेक्स्ट' या 'स्वाइप-टू-टाइप' फ़ीचर के जरिए इन शब्दों का सुझाव नहीं देगा।

इस लिस्ट में कौन से शब्द और वाक्य शामिल हैं?

इसमें शामिल ज्यादातर शब्द और वाक्यांश अश्लील, आपत्तिजनक हैं, या फिर ड्रग्स, सेक्स और हिंसा से जुड़े हैं। हलांकि, इस लिस्ट में राजनीतिक रूप से संवेदनशील शब्द भी शामिल हैं, जैसे 'डिक्टेटर ट्रंप' और 'स्लीपी जो' जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उनसे पहले के राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए इस्तेमाल किए गए हैं।

ट्रंप ने कई बार बाइडन का मजाक उड़ाते हुए उन्हें 'स्लीपी जो' कहा है। iOS के 'प्रिडिक्टिव टेक्स्ट' फ़ीचर से हटाए गए अन्य वाक्यांशों में 'राइट विंग कॉन्स्पिरेसी' 'तिब्बती स्वतंत्रता' और 'यूनाइटेड आयरलैंड'शामिल हैं।

भारत के कण-कौन से शब्द शामिल?

इस लिस्ट का भारत से भी संबंध है। अलग-अलग भाषाओं में कुछ ऐसे शब्द और वाक्यांश होते हैं जिन्हें प्रतिबंधित किया गया है। उदाहरण के लिए, हिंदी में कीबोर्ड का इस्तेमाल करते समय यूजर 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी' और 'लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी' से जुड़े शब्दों को 'स्वाइप-टाइप' नहीं कर सकते।

इसी तरह, फ्रेंच बोलने वाले लोग 'इमिग्रेशन टू हाई' जैसे वाक्यांशों को स्वाइप-टाइप नहीं कर सकते, जबकि हिब्रू बोलने वालों के लिए 'ऑक्यूपाइड टेरिटरीज' जैसे वाक्यांशों पर पाबंदी है। कॉफमैन ने रॉयटर्स को बताया, 'हर प्रमुख भाषा में इस तरह की कुछ पाबंदियां मौजूद हैं।'

उन्होंने माना कि शायद एप्पल का मकसद यूजर्स को गलती से अश्लील संदेश या भड़काऊ नारे भेजने से रोकना हो, लेकिन उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कंपनी जिस तरह से इस फीचर को लागू करती है, उसमें 'गलतियां' हैं।

उदाहरण के तौर पर, उन्होंने अश्लील सामग्री शब्द का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यूजर 'read smut' तो स्वाइप-टाइप कर सकते हैं, लेकिन 'read gay smut' नहीं लिख सकते।

कैसे सामने आई यह लिस्ट?

कॉफमैन को सितंबर में इस लिस्ट का पता चला। उन्होंने देखा कि स्वाइप-टाइप करते समय (यानी कीबोर्ड पर उंगली घुमाकर शब्द लिखते समय) कुछ वाक्यांशों पर कीबोर्ड अटक जाता था।

उदाहरण के लिए, 'bad boy' और 'white man' लिखते समय ऐसा होता था, लेकिन 'bad girl' या 'black man' लिखते समय ऐसा नहीं होता। इस पैटर्न को लेकर उत्सुक होकर, उन्होंने OpenAI के 'कोडेक्स और Anthropic के 'क्लॉड कोड' का इस्तेमाल करके जांच की।

आखिरकार, उन्हें एक ऐसी लिस्ट मिली जो एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम के बहुत गहरे हिस्से में छिपी हुई थी। शब्दों के अलग-अलग संयोजनों को गिनने के तरीके के आधार पर इनकी संख्या अलग-अलग हो सकती है, लेकिन कॉफमैन का अनुमान है कि इसमें लगभग 100000 प्रविष्टियां हैं (इसमें चीनी अक्षर शामिल नहीं हैं)।

रॉयटर्स ने भी स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि की; 'United Ireland' और 'Sleepy Joe' जैसे वाक्यांश स्वाइप-टाइपिंग टेस्ट में फेल हो गए। इसके अलावा, AI साइबर सुरक्षा कंपनी 'टोलमो' के इंजीनियर मैट सुइचे ने भी इसी सूची को खोज निकाला।

उन्होंने कॉफमैन के निष्कर्षों की तुलना एप्पल के आंतरिक डेटा से की, जिसमें लगभग पूरी तरह से मेल पाया गया। सुइचे ने बताया कि यह लिस्ट सालों से सबके सामने ही छिपी हुई थी। इससे पता चलता है कि कैसे सालों से मैसेजिंग ऐप्स के भीतर मानवीय बातचीत को प्रभावित और फिल्टर किया जाता रहा है।'

पारदर्शिता को लेकर चिंताएं क्यों पैदा करती है?

यूजर्स कई सालों से iOS के प्रेडिक्टिव टेक्स्ट प्रतिबंधों पर सवाल उठाते रहे हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर ऐसे वाक्यांशों का जिक्र किया है, जिन्हें वे स्वाइप-टाइप नहीं कर पाए।

इस हफ्ते की शुरुआत में नॉर्वे के एक सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर ने खुद से कुछ प्रतिबंधित शब्दों की एक सूची का पता लगाया, जिसमें 'अल-कायदा', 'ऑशविट्ज' और 'हूटर' जैसे शब्द शामिल थे। हालांकि, संवेदनशील वाक्यांशों की इतनी बड़ी सूची का सामने आना पहली बार हुआ है।

प्रेडिक्टिव टेक्स्ट को लेकर जांच का सामना करने वाली एप्पल अकेली टेक कंपनी नहीं है। अल्फाबेट के स्वामित्व वाली गूगल को भी विवादित ऑटो-कम्प्लीट सुझावों को लेकर बार-बार आलोचनाओं और यहां तक कि मुकदमों का सामना करना पड़ा है।

पिछले साल एप्पल भी तब चर्चा में आ गई थी, जब यूज़र्स ने बताया कि उनके आईफोन पर 'रेसिस्ट' शब्द बोलकर टाइप करने पर, स्क्रीन पर कुछ पल के लिए ट्रंप शब्द दिखाई देने लगा। कंपनी ने इस समस्या को एक तकनीकी गलती बताया और कहा कि इसे ठीक कर दिया गया है।

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