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'अमेरिका में मध्यावधि चुनाव खत्म होते ही तुरंत बंद होगा ईरान के साथ युद्ध', ट्रंप का बड़ा दावा

Published: Thu, 10 Sep 2026 08:23 AM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने US-Iran युद्ध के खत्म होने को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि ...और पढ़ें

US राष्ट्रपति ट्रंप का अमेरिका-ईरान युद्ध पर बड़ा दावा (फोटो-रॉयटर्स)

US राष्ट्रपति ट्रंप का अमेरिका-ईरान युद्ध पर बड़ा दावा (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. ट्रंप ने नवंबर मिड-टर्म चुनाव के बाद युद्ध खत्म होने का दावा किया।

  2. ईरान पर अमेरिकी चुनाव प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया।

  3. IAEA ने ईरान का परमाणु मामला UN सुरक्षा परिषद को भेजा।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को चलते हुए छह महीने से भी ज्यादा का समय हो गया है। अमेरिका-इजरायल ने साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था, तब के बाद से ही मिडिल ईस्ट में युद्ध छिड़ा हुआ है।

अमेरिका और ईरान अब भी एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं। वहीं इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस बात का दावा किया है कि ये युद्ध आखिर कब खत्म होगा।

मिड-टर्म इलेक्शन के बाद खत्म होगा युद्ध

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उन्हें लगता है कि नवंबर में अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव के बाद ईरान के साथ चल रही लड़ाई तुरंत खत्म हो जाएगी। ट्रंप ने तेहरान पर इलेक्शन को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप भी लगाया।

ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि चुनाव के तुरंत बाद लड़ाई खत्म हो जाएगी, क्योंकि ईरान अब और ज्यादा समय तक टिक नहीं सकता।'

हालांकि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि ट्रंप के मुख्य सलाहकार निजी तौर पर चेतावनी दे रहे हैं कि यह लड़ाई उनके कार्यकाल के बचे हुए दो सालों तक भी खिंच सकती है।

UN की निगरानी में ईरान का न्यूक्लियर

वाशिंगटन ईरान को आर्थिक रूप से घेर रहा है। वहीं इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने बुधवार को ईरान के न्यूक्लियर नियमों का पालन न करने के मामले को UN सुरक्षा परिषद को भेजने के लिए वोट किया।

इसे एक कूटनीतिक कदम कहा जा सकता है जिससे तेहरान पर दबाव बढ़ गया है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव को 23-3 वोटों से मंजूरी मिली, जबकि आठ सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। रूस, चीन और नाइजर ने इसके खिलाफ वोट किया।

UN की न्यूक्लियर निगरानी संस्था में ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिकी दबाव में पारित किया गया है। उन्होंने कहा, 'इसका कोई आधार नहीं है और इससे कोई नतीजा नहीं निकलेगा।'

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