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'शांति समझौता न किया तो बर्बाद होगा ईरान', ट्रंप बोले- इस्लामिक राष्ट्र को नहीं बनाने देंगे परमाणु बम

Published: Wed, 23 Sep 2026 05:35 AM (IST)Updated: Wed, 23 Sep 2026 07:01 AM (IST)

ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं बनाने देगा। इससे पूरे विश्व ...और पढ़ें

'शांति समझौता न किया तो बर्बाद होगा ईरान', ट्रंप (फोटो- रॉयटर)

'शांति समझौता न किया तो बर्बाद होगा ईरान', ट्रंप (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. ट्रंप बोले इस्लामिक राष्ट्र को किसी भी हालत में परमाणु बम नहीं बनाने देंगे

  2. ईरान को अलग-थलग करने को अन्य देशों से साथ आने का आह्वान

रॉयटर, संयुक्त राष्ट्र। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से ईरान को बर्बाद करने की चेतावनी दी है। कहा, ईरान ने अमेरिका के साथ शांति समझौता नहीं किया तो उसका बहुत बुरा हश्र होगा।

उन्होंने साफ किया कि अमेरिका ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं बनाने देगा। इससे पूरे विश्व को खतरा है। ट्रंप ने ये बातें मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन को संबोधित करते हुए कही हैं।

इस दौरान उन्होंने एक बार फिर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई समेत दुनिया के आठ युद्ध रुकवाने का दावा करते हुए अपनी पीठ ठोंकी। उन्होंने क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई का संकेत देते हुए कहा कि उसकी आजादी भी दूर नहीं है।

करीब सात महीने से ईरान के साथ युद्ध में फंसे ट्रंप अब उसके साथ शांति समझौता चाहते हैं जिससे तीन नवंबर को अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव के नतीजे उनके पक्ष में आ सकें। लेकिन उन्होंने चुनाव बाद भी समझौता होने का विकल्प खुला रखा है।

अपने भाषण में ट्रंप ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए अन्य देशों से साथ आने का आह्वान किया। कहा, वह ईरान पर आर्थिक दबाव बनाकर उसे वार्ता की टेबल पर लाना चाहते हैं जिससे युद्ध न लड़ना पड़े और खूनखराबा न हो।

ट्रंप ने कहा, वह ईरान के साथ समझौता करके उसका पुनर्निर्माण करना चाहते हैं, उसे महान देश बनाना चाहते हैं लेकिन अगर ईरान वार्ता के जरिये नहीं माना तो वह बर्बाद होगा। ऐसे में उसके लोग मारे जाएंगे और देश नष्ट हो जाएगा।

अमेरिका ईरान की ऐसी दशा कर देगा कि उसकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतरी की कोई उम्मीद नहीं बचेगी। लेकिन उन्हें (ट्रंप को) आशा है कि ईरान सही रास्ता अपनाते हुए अमेरिका के साथ शांति समझौता करेगा।

उन्होंने दावा किया कि विश्व के आठ युद्ध खत्म करवाने में उन्होंने इसी आर्थिक दबाव का सहारा लिया। अब टैरिक लगाकर वह रूस-यूक्रेन युद्ध को भी खत्म करवाएंगे।

ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय को गैरजरूरी करार देते हुए उसके सदस्यों से इस्तीफा देने के लिए कहा है। इसी प्रकार से उन्होंने आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस के स्थान पर अमेरिका के सरकारी दस्तावेजों में अब सुपर इंटेलीजेंस लिखे जाने की जानकारी दी। इस भाषण के बाद ट्रंप करीब 11 देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय या सामूहिक रूप मिलेंगे।

जिन नेताओं से ट्रंप की मुलाकात संभावित है उनमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम, जापान की प्रधानमंत्री साना ताकाइजी, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज प्रमुख हैं।

ट्रंप की बातें सुनकर ईरानी प्रतिनिधियों ने कक्ष छोड़ा

ट्रंप ने जैसे ही ईरान पर कार्रवाई के संबंध में बातें कहनी शुरू कीं तो सभा कक्ष में मौजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य वहां से बाहर चले गए। सभा के अधिवेशन में भाग लेने के लिए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अरागची न्यूयार्क आए हैं लेकिन वे ट्रंप का भाषण सुनने लिए कक्ष में मौजूद नहीं थे।

ट्रंप जब भाषण दे रहे थे उस समय संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर दर्जनों ईरान विरोधी लोग प्रदर्शन के लिए खड़े थे। उन्होंने हाथों में ईरान में तानाशाही खत्म किए जाने और पारदर्शी लोकतंत्र स्थापित किए जाने की मांग वाले बोर्ड ले रखे थे।

संयुक्त राष्ट्र की अति वामपंथी सोच

ट्रंप ने अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र पर अति वामपंथी सोच रखने का आरोप लगाया। कहा, इसमें वे नौकरशाह होते हैं जिन्होंने कभी चुनाव नहीं जीते होते हैं, इसलिए उनका नजरिया व्यावहारिक नहीं होता है। इसीलिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को दिए अमेरिकी अंशदान में 15 प्रतिशत की कटौती की है, इससे चार हजार से ज्यादा नौकरशाहों वाले पद खत्म होंगे।