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'ड्रोन के मामले में अमेरिका से काफी आगे यूक्रेन, रूस युद्ध ने खोल दी हमारी आंखें'; पेंटागन अधिकारी का बड़ा बयान

Published: Thu, 05 Nov 2026 10:43 AM (IST)

पेंटागन के टेक्नोलॉजी चीफ एमिल माइकल ने स्वीकार किया कि अमेरिका आधुनिक ड्रोन युद्ध के लिए तैयार नहीं था और ...और पढ़ें

पेंटागन के CTO एमिल माइकल। (फाइल फोटो।)

पेंटागन के CTO एमिल माइकल। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. अमेरिका आधुनिक ड्रोन युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार नहीं था।

  2. यूक्रेन को अपनी कई युद्ध तकनीकें स्वयं विकसित करनी पड़ीं।

  3. पेंटागन अब भविष्य के युद्धक्षेत्रों का गहन अध्ययन कर रहा है।

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। पेंटागन के टेक्नोलॉजी चीफ एमिल माइकल ने कहा है कि अमेरिका आधुनिक ड्रोन युद्ध के उभार के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने यह भी माना कि यूक्रेन को युद्ध के मैदान में अपनी जरूरत की कुछ तकनीकें खुद विकसित करनी पड़ीं, क्योंकि अमेरिका उन्हें उपलब्ध नहीं करा सका।

वॉल स्ट्रीट जनर्ल टेक कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए माइकल ने कहा कि यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष ने अमेरिका की सैन्य तैयारियों में बड़ी कमियों को उजागर कर दिया है, जिसके बाद देश की ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयासों में तेजी आई है।

'हम पूरी तरह से तैयार नहीं थे'

कैलिफोर्निया के नापा में एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए माइकल ने कहा कि पेंटागन को इस बात का अंदाजा नहीं था कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन कितने अहम हो जाएंगे। उन्होंने कहा, "यूक्रेन और रूस के बीच ड्रोन युद्ध ने हमें पूरी तरह से चौंका दिया।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं था क्योंकि उसने कभी ऐसा सोचा ही नहीं था।

उन्होंने बताया कि रक्षा विभाग अब भविष्य के संघर्षों की तैयारी पर ध्यान दे रहा है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि युद्ध का स्वरूप कैसे बदल सकता है। माइकल ने माना कि हालांकि अमेरिका ने रूस के साथ युद्ध के दौरान यूक्रेन को काफी मदद दी, लेकिन यूक्रेनी सेना को अक्सर युद्ध के मैदान में खुद ही अपने समाधान खोजने पड़े।

उन्होंने कहा, "हमने यूक्रेन की बहुत मदद की, लेकिन उन्हें जिस चीज की ज़रूरत थी उसे उन्होंने खुद ही ईजाद कर लिया क्योंकि हमारे पास वह मौजूद नहीं थी।"

भंडार में बढ़ोतरी लेकिन यूक्रेन बहुत आगे

माइकल ने बताया कि पिछली अमेरिकी सरकार के कार्यकाल में लगभग 1,000 ड्रोन बनाए गए थे, जबकि अब उनके पास करीब 500,000 ड्रोन का भंडार है। यह संख्या उस 80 से 100 लाख (8 से 10 मिलियन) ड्रोन के मुकाबले बहुत कम है, जिन्हें यूक्रेन इस साल बनाने का अनुमान लगा रहा है। रूस के साथ यूक्रेन का युद्ध अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर रहा है।

भविष्य के युद्धक्षेत्रों का अध्ययन कर रहा है पेंटागन

माइकल ने बताया कि रक्षा विभाग के प्रोजेक्ट मेरिडियन को यह जांचने का काम सौंपा गया है कि भविष्य में युद्ध किस तरह के हो सकते हैं, जिसमें जमीन के नीचे और अंतरिक्ष में होने वाले संभावित संघर्ष भी शामिल हैं। इस पहल में स्पेसएक्स के मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और एंडुरिल इंडस्ट्रीज के संस्थापक पामर लकी जैसी उद्योग जगत की हस्तियां शामिल हैं।

AI के जरिए लक्ष्य तय करने को लेकर सावधानी

भले ही पेंटागन सस्ते और स्वायत्त सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, लेकिन माइकल का कहना है कि युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर सेना अभी भी काफी सतर्क है।

उन्होंने बताया कि लक्ष्य तय करने की प्रक्रिया आज भी एआई के बजाय खुफिया रिपोर्टों, सैटेलाइट तस्वीरों और इंसानों द्वारा की गई जांच पर ज्यादा निर्भर है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई के जरिए लक्ष्य तय करने के मामले में अमेरिका अभी बहुत उन्नत नहीं है।

माइकल ने पिछले साल फरवरी में ईरान में हुए अमेरिकी हमले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस हमले में एक लड़कियों का स्कूल निशाना बन गया था, जिसे अमेरिका ने गलती से सैन्य ठिकाना समझ लिया था। इस घटना में दर्जनों बच्चों समेत 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

अमेरिका ने अपनी जांच के नतीजे जारी नहीं किए हैं और इस हमले की योजना में एआई टारगेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था। माइकल ने कहा कि हर स्तर पर इंसानी समझ और सही फैसले की जरूरत होनी चाहिए।

एन्थ्रोपिक के बारे में

माइकल ने एआई कंपनी एन्थ्रोपिक की अपनी आलोचना को भी दोहराया। रक्षा विभाग ने पहले ही इस कंपनी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। उन्होंने कहा कि पेंटागन के लिए एन्थ्रोपिक के मॉडल का इस्तेमाल बंद करना कोई मुश्किल काम नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा विभाग अपने नेटवर्क पर गूगल, ओपनएआई और ग्रोक के एआई मॉडल का इस्तेमाल करना जारी रखे हुए है।

AI के मामले में अमेरिका अभी भी चीन से आगे

वैश्विक एआई दौड़ पर माइकल का तर्क है कि अमेरिका को चीन पर बढ़त हासिल है, क्योंकि उसके पास एडवांस्ड सेमीकंडक्टर और डेटा-सेंटर की बड़ी क्षमता मौजूद है। माइकल के अनुसार, एआई के विकास में बीजिंग, अमेरिका से लगभग छह महीने से एक साल पीछे है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच मुकाबला काफी कड़ा है।

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