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    ईंधन की कीमतों में लगी आग बुझाने के लिए ट्रंप का बड़ा कदम, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए

    Updated: Sat, 21 Mar 2026 06:59 AM (IST)

    अमेरिकी वित्त विभाग ने शुक्रवार देर रात घोषणा की कि ईरान और रूस के तेल पर लगे दीर्घकालिक प्रतिबंधों को अगले एक महीने के लिए अस्थायी रूप से हटा दिया गय ...और पढ़ें

    ट्रंप ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए (फोटो- रॉयटर)

    ट्रंप ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए (फोटो- रॉयटर)

    HighLights

    1. ट्रंप की शेयर बाजार और महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश

    2. अब 19 अप्रैल तक बिना जुर्माने के बिकेगा ईरानी तेल

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते तेल संकट और आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने शुक्रवार देर रात घोषणा की कि ईरान और रूस के तेल पर लगे दीर्घकालिक प्रतिबंधों को अगले एक महीने के लिए अस्थायी रूप से हटा दिया गया है।

    क्यों लिया गया यह फैसला

    पिछले महीने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के बाद से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में आए तीव्र उछाल ने अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा दिया था। मुद्रास्फीति और शेयर बाजार में भारी गिरावट को रोकने की उम्मीद में ट्रंप प्रशासन ने यह सामान्य लाइसेंस जारी किया है।

    छूट में ये मिलेगा

    अस्थायी छूट: यह छूट 19 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान ईरानी तेल की बिक्री, वितरण और अनलोडिंग पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।
    प्रतिबंधित जहाजों को राहत: अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के नए आदेश के तहत, अब उन जहाजों से भी तेल खरीदा और उतारा जा सकेगा जो पहले से 'ब्लैकलिस्ट' या प्रतिबंधित थे।
    रूस और ईरान दोनों को कवर: यह लाइसेंस रूसी और ईरानी तेल को लक्षित करने वाले दस अलग-अलग कड़े प्रतिबंधों को शिथिल करता है।

    प्रतिबंधों को इसलिए हटा रहा वाशिंगटन

    दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई कड़े प्रतिबंध स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ईरान की 'दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों' और आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप में लगाए थे। वहीं रूसी तेल पर प्रतिबंध 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद लगाए गए थे। लेकिन वर्तमान युद्ध की विभीषिका और वैश्विक ईंधन-खाद्य सुरक्षा के खतरे ने वाशिंगटन को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

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