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सऊदी प्रिंस की मदद की अपील के बाद हूतियों पर हमले को तैयार था अमेरिका, फिर ट्रंप ने क्यों लिया यू-टर्न?

Published: Mon, 21 Sep 2026 02:37 PM (IST)

अमेरिका ने यमन में हूती विद्रोहियों पर हवाई हमले की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन अंतिम समय में राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे रद कर दिया।

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। यमन में हूती विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव और लाल सागर के रणनीतिक क्षेत्रों पर उनके कब्जे को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने हूती ठिकानों पर हवाई हमले की पूरी तैयारी कर ली थी और युद्धक विमान उड़ान भरने के लिए लगभग तैयार थे।

लेकिन ऐन मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान को रद कर दिया। ट्रंप ने यह फैसला ऐसे समय में लिया, जब अमेरिका के अहम सहयोगी सऊदी अरब ने उनसे तत्काल मदद की गुहार लगाई थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने हूती ठिकानों पर हमले के लिए टारगेट लिस्ट को अंतिम रूप दे दिया था। स्थिति इतनी आगे बढ़ चुकी थी कि युद्धक विमानों में बम तक लोड किए जा रहे थे। हालांकि, यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर अमेरिकी सैनिकों के हमले से ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मिशन से पीछे हटने का फैसला कर लिया।

लाल सागर के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर यमन के हूतियों का नियंत्रण तेजी से बढ़ रहा था। इस खतरे को रोकने के लिए सऊदी अरब लगातार अमेरिकी सैन्य सहायता की मांग कर रहा था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति इस लड़ाई में सीधे तौर पर उलझने से हिचकिचा रहे थे।

ट्रंप ने हूती पर हमले से क्यों लिया यू-टर्न?

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि यह मामला पिछले हफ्ते तब और गरमा गया, जब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप को फोन किया।

ईरान के साथ तनाव के बीच अमेरिका के प्रमुख सहयोगी माने जाने वाले क्राउन प्रिंस ने तेजी से आगे बढ़ रहे हूती गुट को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति से एक बार फिर सीधे सैन्य हस्तक्षेप की अपील की थी। इसके बावजूद, अंतिम क्षणों में ट्रंप ने हमले की योजना को टाल दिया।

इससे ठीक एक दिन पहले ट्रंप ने कथित तौर पर अपने सलाहकारों से कहा था कि वह हूती और सऊदियों के बीच चल रही लड़ाई में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, गुरुवार को क्राउन प्रिंस के साथ फोन पर बात करने के बाद ट्रंप अपने शब्दों से पीछे हट गए और उन्होंने पेंटागन के अधिकारियों को यमन के मिलिशिया के खिलाफ हवाई हमलों की तैयारी करने को कहा।

हूतियों के खिलाफ नहीं होगा अमेरिकी हवाई हमला

रविवार तक ट्रंप ने अपना फैसला फिर से बदल लिया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल हूतियों के खिलाफ कोई अमेरिकी हवाई हमला नहीं होगा। ट्रंप ने आखिरी समय में अपनी योजना तब बदल दी, जब कमांडरों ने लक्ष्य सूचियों को मंजूरी दे दी थी, मिशन के लिए चुने गए अमेरिकी युद्धक विमानों पर सैनिक बम लोड कर रहे थे और हमलों की लहर बस शुरू ही होने वाली थी।

अभी तक, व्हाइट हाउस ने ट्रंप के रुख बदलने पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका का सऊदी अरब के साथ एक रक्षा समझौता है, और हम हमेशा अपने सहयोगियों की रक्षा करेंगे।

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने प्रकाशन को बताया कि राष्ट्रपति के करीबी लोगों में से अधिकांश हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की लड़ाई में शामिल होने को लेकर या तो गहराई से संशय में हैं या इसके पूरी तरह से खिलाफ हैं, खासकर तब जब अमेरिकी सेना पहले से ही ईरान के साथ युद्ध के तनाव का सामना कर रही है।

अमेरिका से नहीं लड़ेंगे हूती 

फॉक्स न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने बताया कि हूतियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर हमला न करने की सहमति दी है, भले ही ईरान-समर्थित यह समूह अमेरिका के सहयोगी सऊदी अरब के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज कर रहा हो। वाशिंगटन हूतियों के साथ लगातार संपर्क में है और वे अमेरिका से न लड़ने के लिए सहमत हुए हैं।

ट्रंप पहले भी यह दावा कर चुके हैं कि हूती इस क्षेत्र में अमेरिकी बलों पर हमला करने से बच रहे हैं। 12 सितंबर को आयरलैंड की यात्रा के दौरान ट्रंप ने कहा था कि हूतियों ने हमें बुलाया था और वे हमसे लड़ना नहीं चाहते। वे नहीं चाहते कि हम उनके पीछे पड़ें।

रियाद पर बढ़ता दबाव

ताजा टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के करीबी सहयोगी सऊदी अरब पर भारी दबाव है, क्योंकि सप्ताहांत में राजधानी रियाद को निशाना बनाकर एक मिसाइल दागी गई थी।

हूतियों ने यमन के भीतर भी तेजी से आक्रामक अभियान चलाया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण वाले एक बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है।

ईरान पर निर्णय लेने की स्थिति

फॉक्स न्यूज के अनुसार, ट्रंप ईरान के मुद्दे पर निर्णय लेने की स्थिति में हैं, जहां अमेरिकी और इजरायली बलों ने 28 फरवरी को बड़े पैमाने पर हवाई बमबारी अभियान शुरू किया था और अब यह गतिरोध लगभग सात महीने से जारी है।

ट्रंप ने बताया कि निकट भविष्य में बड़ी चीजें होने वाली हैं और ईरानी बेहतर तरीके से पेश आएं, और वह इस बात पर विचार कर रहे हैं कि उनके देश को उड़ाना है या नहीं।

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