'चांद पर किसी देश का हक नहीं', ट्रंप के दावे पर मचा बवाल; क्या कहता है अंतरिक्ष कानून?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'चांद हमारा है' वाले बयान ने अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। हालांकि, 1967 की 'आउटर ...और पढ़ें

ट्रंप के चांद हमारा है दावे पर बवाल (फोटो- रॉयटर्स)
HighLights
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर 'चांद हमारा है' का दावा किया।
1967 की 'आउटर स्पेस ट्रीटी' मालिकाना हक से रोकती है।
चंद्रमा के संसाधनों पर अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों में मतभेद।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हाल ही में ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में चांद की एक तस्वीर के साथ लिखा था- The Moon is Our यानी 'चांद हमारा है।'
ट्रंप के इस पोस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस छिड़ गई है। क्या वाकई कोई देश चांद पर अपना मालिकाना हक जता सकता है? क्या अमेरिका चांद पर अपना कब्जा जमा सकता है? और अगर चांद किसी का नहीं है, तो वहां मौजूद पानी, बर्फ और खनिज किसके होंगे? ऐसे में चलिए जानते हैं क्या कहता है इसको लेकर आउटर स्पेस ट्रीटी कानून...?
दरअसल, आधी सदी से भी पुराने 1967 के 'आउटर स्पेस ट्रीटी' (बाहरी अंतरिक्ष संधि) कानून के मुताबिक, अमेरिका समेत दुनिया का कोई भी देश चंद्रमा पर संप्रभुता या स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता।
क्या है 1967 का कानून?
साल 1967 में दुनिया के कई देशों ने बाहरी अंतरिक्ष संधि पर सहमति जताई थी। इस संधि में साफ कहा गया है कि चांद और दूसरे खगोलीय पिंड किसी एक देश की संपत्ति नहीं हो सकते।
ऐसे में यह साफ है कि अमेरिका चांद पर चाहे अपना झंडा लगा ले या इमारत बना ले, इससे चांद की जमीन उसका नहीं हो सकता है। इसी तरह भारत, चीन, रूस या कोई अन्य देश भी चांद के किसी हिस्से को अपना नहीं बता सकते।
खनन से निकाली गई चीजों का मालिक कौन होता है?
अंतरिक्ष कानून चंद्रमा की सतह पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और वहां से निकाले जा चुके पदार्थों के बीच स्पष्ट अंतर करता है। 'आउटर स्पेस ट्रीटी' (Outer Space Treaty) किसी भी देश को चंद्रमा के किसी क्षेत्र पर मालिकाना हक जताने की अनुमति नहीं देती।
इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों के बीच दो मुख्य मत हैं-
पहला पक्ष (संसाधन उपयोग के समर्थन में) इस विचार के अनुसार, चंद्रमा से सामग्री निकालना और उस पर अधिकार स्थापित करना संप्रभुता का दावा करने जैसा नहीं है, बशर्ते यह गतिविधि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों के दायरे में रहकर की जाए।
दूसरा पक्ष (साझा हित के समर्थन में) इस विचार के अनुसार, निजी कंपनियों या देशों को चंद्र संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग करने की अनुमति देना 'आउटर स्पेस ट्रीटी' की मूल भावना के खिलाफ है, क्योंकि यह संधि मानती है कि अंतरिक्ष का उपयोग और लाभ सभी देशों के साझे हित में होना चाहिए।
क्या कहा था ट्रंप ने?
बता दें कि बीते 6 सितंबर को ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए घोषणा की , "चंद्रमा हमारा है"। इस पोस्ट के साथ उन्होंने अमेरिकी झंडे, चंद्रमा की सतह और अमेरिकी स्पेस फोर्स की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई गई कई तस्वीरें भी शेयर कीं।
हालांकि अमेरिका चंद्र अभियानों में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है, लेकिन ट्रंप का यह दावा आधी सदी से भी अधिक पुराने अंतरराष्ट्रीय कानून के बिल्कुल विपरीत है। यह कानून स्पष्ट करता है कि अमेरिका समेत दुनिया का कोई भी देश चंद्रमा पर अपना मालिकाना हक नहीं जता सकता।
