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ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' दुनिया के लिए चेतावनी, इन 5 सेक्टर्स पर पड़ेगा असर

Updated: Tue, 25 Aug 2026 04:33 AM (IST)

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' नामक एक अभूतपूर्व आर्थिक अभियान शुरू किया है।

ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट'। (रॉयटर्स)

ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट'। (रॉयटर्स)

HighLights

  1. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू किया।

  2. ईरान के वित्तीय नेटवर्क और तेल राजस्व को निशाना बनाया जाएगा।

  3. डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन, शिपिंग होंगे प्रभावित।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक अभूतपूर्व आर्थिक अभियान शुरू किया है, जिसे ट्रेडरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने यह नाम दिया है। इस अभियान में ईरान के फाइनेंशियल नेटवर्क, तेल से होने वाली कमाई और ग्लोबल संबंधों को निशाना बनाने जा रहा है, क्योंकि वाशिंगटन तेहरान पर दबाव बढ़ाना चाहता है।

बसेंट ने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के निर्देश पर 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू किया है। उन्होंने इस अभियान की तुलना दूसरे विश्व युद्ध के दौरान D-Day पर मित्र देशों के हमले से की।

ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट'

उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर, अमेरिकी ट्रेजरी ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू किया है। यह इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और उसका साथ देने वालों के खिलाफ एक अभूतपूर्व अभियान है।

दूसरे विश्व युद्ध में, D-Day हमारे सहयोगियों के साथ मिलकर दुश्मन को उसकी जगहों से हटाने और निशाना बनाने के अभियान की ऐतिहासिक शुरुआत थी, जिसमें तीसरे देशों में मौजूद ठिकाने भी शामिल थे। आज, उसी भावना के साथ, हम दुनिया भर में ईरान के फाइनेंशियल कनेक्शन के खिलाफ आर्थिक हमला शुरू कर रहे हैं।

अमेरिका का मकसद ईरान के फाइनेंशियल चैनलों को काटना

बेसेंट ने कहा कि इसका मकसद ईरान की सरकार को सपोर्ट करने वाले फाइनेंशियल चैनलों को काटना है, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े चैनल भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा मकसद हर उस आर्थिक लाइफलाइन को खत्म करना है जो इस अत्याचारी शासन को बनाए रखती है, ताकि तेहरान अकेला पड़ जाए।

बेसेंट ने कहा कि इन प्रतिबंधों का असर 5 मुख्य सेक्टर पर पड़ेगा

  1. डिजिटल एसेट्स
  2. टेक्नोलॉजी
  3. सोना
  4. एविएशन
  5. शिपिंग

उन्होंने कहा कि अब दुनिया के नेताओं के लिए अमेरिका और ईरान के बीच फैसला करने का समय आ गया है।

बेसेंट ने कहा कि जिसे उन्होंने आतंकवादी शासन कहा, उसके साथ लगातार आर्थिक संबंध बनाए रखने से इसमें शामिल लोगों को अमेरिकी फाइनेंशियल ताकत का सामना करना पड़ सकता है। बेसेंट ने तेहरान के सामने दो रास्ते रखे, पूरी तरह से दुनिया से अलग-थलग पड़ना या सामान्य आर्थिक संबंधों पर लौटना।

बेसेंट के भाषण से ठीक पहले, अमेरिकी ट्रेजरी ने परमाणु, मिसाइल, साइबर और तेल नेटवर्क से जुड़ी ईरान की लगभग 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए थे। इन उपायों का मकसद उन ब्रोकर कंपनियों के नेटवर्क को निशाना बनाना भी था जो संयुक्त अरब अमीरात, हांगकांग, चीन, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और यूरोप में काम करने वाले 'शैडो-फ्लीट' को सपोर्ट कर रही थीं।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ रहा दबाव

ये उपाय ऐसे समय में किए गए हैं जब ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। रियाल की कीमत गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर यानी लगभग 20.2 लाख रियाल प्रति डॉलर पर आ गई है, जबकि युद्ध शुरू होने के बाद से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ गए हैं।

ट्रंप ने इस अभियान को ईरान को आर्थिक और सैन्य रूप से बर्बाद करने की दिशा में एक कदम के तौर पर भी पेश किया है।