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भारत के पास 190 परमाणु बम, समुद्र में बना रहा ‘न्यूक्लियर कवच’; अमेरिकी रिपोर्ट में दावा

Published: Thu, 10 Sep 2026 11:35 PM (IST)

अमेरिकी विज्ञानियों की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु हथियार हैं और वह अपने परमाणु जखीरे का लगातार आधुनिकीकरण कर रहा है।

भारत के पास 190 परमाणु बम (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

भारत के पास 190 परमाणु बम (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

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पीटीआई, वाशिंगटन। भारत के परमाणु जखीरे को लेकर अमेरिकी विज्ञानियों ने नया अनुमान जारी किया है। फेडरेशन आफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (एफएएस) के मुताबिक, भारत के पास करीब 190 परमाणु हथियार हो सकते हैं।

इनमें से लगभग 160 हथियार ऐसे लांचरों पर तैनात हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि 30 अतिरिक्त वारहेड नई मिसाइलों के लिए तैयार किए जा रहे हैं।

एफएएस ने यह अनुमान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं, सरकारी आंकड़ों और व्यावसायिक उपग्रह तस्वीरों के आधार पर लगाया है।

एफएएस के न्यूक्लियर इंफार्मेशन प्रोजेक्ट के निदेशक हांस क्रिस्टेनसेन ने ‘भारत के परमाणु हथियार-2026’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर अनुमान है कि भारत अब तक करीब 190 परमाणु हथियार तैयार कर चुका है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने परमाणु हथियारों का लगातार आधुनिकीकरण कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कई नए हथियार तंत्र तैनात किए गए हैं, जबकि कई अन्य विकसित किए जा रहे हैं। इनमें परमाणु हथियार ले जाने वाले विमान, जमीन से मार करने वाली मिसाइलें और समुद्र से परमाणु हमला करने में सक्षम प्रणालियां शामिल हैं।

एफएएस का अनुमान है कि भारत ने 140 से 225 परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त सैन्य प्लूटोनियम तैयार किया होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत तक इंटरनेशनल पैनल आन फिसाइल मैटेरियल्स का अनुमान था कि भारत के पास करीब 730 किलोग्राम हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम हो सकता है। इसमें करीब 170 किलोग्राम की कमी या अधिकता की संभावना भी बताई गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि एक वारहेड के लिए औसतन चार किलोग्राम प्लूटोनियम की जरूरत मानी जाए तो उपलब्ध मात्रा सैद्धांतिक रूप से 140 से 225 वारहेड के लिए पर्याप्त हो सकती है।

हालांकि, यह केवल एक अनुमान है और इसमें कई अनिश्चितताएं हैं। मसलन, भारत के परमाणु हथियारों का वास्तविक डिजाइन और उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री की मात्रा सार्वजनिक नहीं है।