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जापान में फिर लगे भूकंप के झटके, 5.8 रही तीव्रता; सुनामी का खतरा नहीं

Published: Sat, 01 Aug 2026 11:27 AM (GMT+05:30)

जापान के आओमोरी प्रांत में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई प्रशांत तट से 80 किमी थी, लेकिन सुनामी का कोई खतरा नहीं है।

जापान में 5.8 तीव्रता का भूकंप (फोटो-रॉयटर्स)

जापान में 5.8 तीव्रता का भूकंप (फोटो-रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, टोक्यो। जापान में कुदरत का कहर थम नहीं रहा है। शनिवार को उत्तरी जापान के आओमोरी प्रांत के पास 5.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। जापान मौसम विज्ञान के अनुसार, यह भूकंप स्थानीय समय के अनुसार सुबह 11:48 बजे आओमोरी के प्रशांत तट से लगभग 80 किलोमीटर की गहराई में आया।

जापानी पैमाने (7-पॉइंट स्केल) पर इसकी तीव्रता 4 दर्ज की गई। भूकंप के बाद सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। भूकंप का केंद्र 41.3 डिग्री उत्तर अक्षांश और 142.0 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित था। जापान में कुछ ही दिन पहले आए एक अन्य शक्तिशाली और विनाशकारी भूकंप के झटकों से 35 लोगों की मौत हुई थी।

चार दिन पहले 35 लोगों की हुई थी मौत

हाल ही में मंगलवार को कुमामोटो प्रांत में शाम 4:27 बजे तीव्रता 7 का एक भीषण भूकंप आया था, जिसने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई। शुक्रवार को अधिकारियों ने पुष्टि की कि आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है।

मृतकों में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनकी मौत के सटीक कारणों की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत सीधे झटकों की वजह से हुई या अन्य कारणों से।

पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और गाड़ियों में रात बिताने को मजबूर लोग

कुमामोटो के आपदा प्रभावित इलाकों जैसे यात्सुशिरो और उकी शहरों में जमीनी हालात बेहद भयावह हैं। मुख्य सड़कें मुड़ चुकी हैं और उनमें गहरी दरारें आ गई हैं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

कई जगहों पर ट्रैफिक सिग्नल ठप पड़े हैं और ईंधन की भारी किल्लत के कारण गैस स्टेशनों पर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई नागरिक ईंधन के इंतजार में अपनी गाड़ियों में ही रात बिताने को मजबूर हैं।

राहत शिविरों में शरण लेने को विवश सैकड़ों परिवार

उकी शहर के ओगावा जिले में स्थित एक नागरिक गतिविधि केंद्र को आपातकालीन राहत शिविर में बदल दिया गया है, जहां करीब 500 से ज्यादा बुजुर्गों, बच्चों और परिवारों ने शरण ली हुई है। शिविर के अंदर का नजारा बेहद भावुक करने वाला है।

शिविर में लोग फर्श पर मैट बिछाकर अपने सामान, कपड़ो और पानी की बोतलों के बीच रहने को मजबूर हैं। बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिविर के बाहर एक दर्जन से अधिक पोर्टेबल शौचालय लगाए गए हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में मदद पहुंचाने में जुटे हैं।

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