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ईरान के वो 'शक्तिशाली चेहरे' जो अभी भी संभाल रहे हैं तेहरान की कमान: इजरायली हमलों के बीच कौन है मैदान में?

Published: Thu, 26 Mar 2026 04:08 PM (IST)Updated: Thu, 26 Mar 2026 05:16 PM (IST)

अहमद वाहिदी (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स), इस्माइल कानी (कुद्स फोर्स), मोहम्मद बाकिर गालिबाफ (संसद स्पीकर) और अब्बास अरागची (विदेश मंत्री) जैसे प्रमुख ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में हाल के दिनों में हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों ने वहां के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को झकझोर कर रख दिया है। कई बड़े चेहरों के मारे जाने के बाद अब दुनिया की नजरें उन नेताओं पर टिकी हैं, जो इस समय ईरान की सत्ता और सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रहे हैं। तेहरान के गलियारों में अब कौन से नाम सबसे प्रभावशाली बचे हैं और वे ईरान की अगली रणनीति को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, यह समझना बेहद जरूरी है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख चेहरे

अहमद वाहिदी को अब ईरान की सुरक्षा का सबसे बड़ा स्तंभ माना जा रहा है। वे पहले भी प्रभावशाली व्यक्ति रहे हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के वर्तमान प्रमुख के रूप में, उनकी नियुक्ति तब हुई जब उनके दो पूर्ववर्ती मारे गए थे। वाहिदी ईरान-इराक युद्ध के अनुभवी योद्धा रहे हैं और पहले कुद्स फोर्स का नेतृत्व करने के साथ-साथ देश के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। उनके पास सैन्य रणनीति का दशकों पुराना अनुभव है।

वहीं, कुद्स फोर्स की कमान अब इस्माइल कानी के हाथों में है। साल 2020 में कासिम सुलेमानी की मौत के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली। कानी एक बेहद गोपनीय तरीके से काम करने वाले शख्स हैं और पूरे क्षेत्र में ईरान के सहयोगी समूहों (प्रॉक्सी) और मित्र देशों के साथ तालमेल बिठाने का सारा जिम्मा उन्हीं के कंधों पर है।

समुद्री सुरक्षा का दारोमदार किसपर?

अलीरेजा तंगसिरी ईरान की नौसैनिक ताकत का चेहरा हैं। 2018 से IRGC के नेवल हेड के रूप में कार्यरत तंगसिरी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की घेराबंदी और वहां ईरानी नियंत्रण बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

समुद्री युद्ध और रणनीतिक जलमार्गों पर उनकी पकड़ ईरान की रक्षा नीति का अहम हिस्सा है। राजनीतिक मोर्चे पर मोहम्मद बाकिर गालिबाफ इस समय सबसे बड़े खिलाड़ी माने जा रहे हैं। वर्तमान में संसद के स्पीकर कलीबाफ पहले तेहरान के मेयर और IRGC के कमांडर भी रह चुके हैं।

उनकी चर्चा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि कहा जाता है कि वे हाल के दिनों में अमेरिका के साथ पर्दे के पीछे बातचीत की मेज पर ईरान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

विदेश नीति और कूटनीति का मोर्चा किसके हाथों में है?

  • ईरान की विदेश नीति का भार इस समय विदेश मंत्री अब्बास अरागची पर है। विदेश मंत्री के तौर पर अरागजी एक अनुभवी राजनयिक माने जाते हैं।
  • उन्होंने सालों तक ईरान के पड़ोसियों, पश्चिमी देशों और विशेष रूप से रूस और चीन के साथ हाई-स्टेक वार्ताओं का नेतृत्व किया है। उनकी भूमिका ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग होने से बचाने के लिए बहुत अहम है।
  • दूसरी तरफ सईद जलीली का नाम ईरान के कट्टरपंथी धड़े के तौर पर उभरता है। वे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व प्रमुख रहे हैं और परमाणु वार्ता के दौरान अपनी बेहद सख्त छवि के लिए जाने जाते हैं।
  • ईरान-इराक युद्ध में घायल हुए जलीली आज भी ईरानी राजनीति में एक समझौते न करने वाले नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।

न्यायपालिका और धार्मिक परिषद में किसका है प्रभाव?

न्यायपालिका के प्रमुख अयातुल्ला गुलामहुसैन मोहसेनी-ईजेई ईरान की आंतरिक व्यवस्था को सख्त बनाए रखने के जिम्मेदार हैं। पूर्व इंटेलिजेंस हेड रह चुके ईजेई को 2009 के विरोध प्रदर्शनों को दबाने में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। उन्हें एक कट्टरपंथी नेता माना जाता है जो ईरान के भीतर किसी भी तरह के विद्रोह को रोकने के लिए अपनी पहचान रखते हैं।

धार्मिक मामलों और चुनाव प्रक्रिया में अयातुल्ला अलीरेजा अराफी का कद बहुत बड़ा है। वे गार्जियन काउंसिल के प्रमुख सदस्य हैं, जो यह तय करती है कि कौन चुनाव लड़ सकता है और कौन नहीं। खामेनेई के बाद देश चलाने के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद में उन्हें शामिल किया जाना उनकी शक्ति का प्रमाण है।

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन कितने ताकतवर?

ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान हालांकि देश के सबसे बड़े निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, लेकिन उनकी वास्तविक शक्तियों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ईरान की मौजूदा व्यवस्था में राष्ट्रपति का पद पहले की तुलना में कम प्रभावी माना जाता है। इसकी एक बानगी तब दिखी जब खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों के लिए माफी मांगने पर उन्हें IRGC की कड़ी नाराजगी झेलनी पड़ी थी।

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