हिंसक प्रदर्शनों के बीच ईरान अमेरिका से बातचीत को तैयार, हमले पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
महंगाई के विरोध में राष्ट्रव्यापी हिंसक प्रदर्शनों के बीच ईरान ने अमेरिका से वार्ता की इच्छा जताई है, लेकिन हमले ...और पढ़ें

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची। (रॉयटर्स)
HighLights
ईरान अमेरिका से वार्ता को तैयार, हमले पर चेतावनी।
हिंसक प्रदर्शनों में 544 मौतें, 11 हजार गिरफ्तार।
ईरान ने विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगाया, स्थिति नियंत्रण में।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महंगाई के विरोध में राष्ट्रव्यापी हिंसक प्रदर्शनों के बीच ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका से वार्ता के लिए तैयार है लेकिन हमला हुआ तो उसका पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान वार्ता करना चाहता है, इसलिए अमेरिकी अधिकारियों से उनकी वार्ता हो सकती है। वैसे वह ईरान के विपक्ष के नेताओं के संपर्क में हैं। लेकिन सैन्य कार्रवाई का विकल्प उनके पास है।
इस बीच राजधानी तेहरान और अन्य ईरानी शहरों में विरोध प्रदर्शन और हिंसा जारी है। इस हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 544 हो गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया है कि विदेश मंत्री अब्बास अरागजी और ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकाफ आपसी संपर्क में हैं। दोनों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। इसके लिए हमारा परंपरागत मध्यस्थ स्विट्जरलैंड सक्रिय है।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ईरान कभी भी बातचीत का रास्ता बंद नहीं करता है लेकिन अमेरिका गंभीरता न दिखाते हुए इसके विपरीत संकेत दे रहा है। इससे पहले विदेश मंत्री अरागची ने तेहरान में विदेशी राजनयिकों के समक्ष अपने देश का पक्ष रखा और बताया कि वह हर मसले पर अमेरिका के साथ वार्ता को तैयार है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन, इटली, जर्मनी और फ्रांस के तेहरान में नियुक्त राजदूतों को तलब कर उनके देश में हो रहे ईरान विरोधी प्रदर्शनों पर आपत्ति जताई है। कहा कि गलत सूचनाओं पर आधारित विरोध प्रदर्शनों के लिए अनुमति न दी जाए।
ईरानी शहरों में महंगाई और इस्लामिक सत्ता का विरोध जारी है। लाखों लोग सड़कों पर हैं। कई स्थानों पर उनका सुरक्षाकर्मियों के साथ टकराव हो रहा है। इसके चलते 28 दिसंबर से जारी आंदोलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 544 हो गई है, सैकड़ों घायल हैं। लगभग 11 हजार लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
इंटरनेट और टेलीफोन सुविधा पर रोक के कारण सही सूचनाओं का पता नहीं चल रहा है। विदेशी मीडिया के कवरेज पर भी रोक लगा दी गई है और ईरान का सरकारी मीडिया सीमित सूचनाएं ही दे रहा है, इसलिए मृतकों और घायलों की सही संख्या का पता नहीं चल रहा है।
इस बीच तेहरान के इंकलाब चौक पर बड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए ईरानी संसद के स्पीकर मुहम्मद बाकर खलीफा ने कहा, ईरान इस समय चार मोर्चों पर लड़ रहा है। यह लड़ाई आर्थिक मोर्चे, मनोवैज्ञानिक मोर्चे, अमेरिका व इजरायल के खिलाफ सैन्य मोर्चे पर और देश के भीतर आतंकवाद से है। यही आतंकी देश के भीतर तोड़फोड़ और आगजनी करके अराजकता फैला रहे हैं।
अगर ईरान पर हमला होता है तो जवाबी कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे और इजरायल हमारे निशाने पर होंगे। इस दौरान विदेश मंत्री अरागची ने बताया कि ताजा आंदोलन में 53 मस्जिदों और 180 एंबुलेंस में आग लगा दी गई।
उन्होंने कहा, कोई भी ईरानी नागरिक मस्जिद पर हमला नहीं कर सकता है और न ही उसमें आग लगा सकता है, हिंसा और अराजकता के पीछे अन्य देशों के लोग और एजेंसियां हैं। अरागची ने कहा है कि दो हफ्ते के हिंसक आंदोलन के बावजूद स्थिति नियंत्रण में है, सुरक्षा बल संयमित कार्रवाई कर रहे हैं।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)
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