अमेरिका-सऊदी अरब ने इराक में ईरानी ठिकानों पर दागी मिसाइलें, ड्रोन हमलों का दिया जवाब
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से खाड़ी देशों में युद्ध तेज हो गया है। ईरान के अमेरिकी ठिकानों पर हमले के बाद अमेरिका ने इराक में ईरानी ठिकानों पर ...और पढ़ें
HighLights
अमेरिका-सऊदी अरब ने इराक में ईरानी ठिकानों पर हमला किया।
ईरान ने खाड़ी में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमला किया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर।
डिजिटल डेस्क, तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों के तरफ से हमले बढ़ रहे हैं और इसके चलते एक बार फिर खाड़ी देशों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया था। वहीं अमेरिका और सऊदी अरब की सेना ने इन हमलों का जवाब दिया है।
अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर दागी मिसाइलें
अमेरिकी बेस पर हुए ड्रोन हमलों के बाद अमेरिका और सऊदी अरब की सेना ने इराक में ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमला किया है।
इससे पहले अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने मंगलवार को जानकारी दी कि ईरान ने अमेरिकी बेस पर हमला करने की कोशिश की, जिसे अमेरिकी सेना ने बीच में ही रोक लिया।
अमेरिका ने यह भी बताया कि ईरान के इस हमले में कोई नुकसान नहीं हुआ है। इन हमलों के साथ ही मिडिल ईस्ट में फिर एक बार तनाव बढ़ गया है।
सऊदी अरब ने भी इराक में ईरान समर्थित ठिकानों पर US के साथ मिलकर हवाई हमले करने की पुष्टि की। सऊदी अरब ने US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ मिलकर हवाई हमले किए और इस ऑपरेशन को सऊदी तेल सुविधाओं पर हाल के ड्रोन हमलों का जवाब बताया।
क्या फिर बंद हो गया होर्मुज?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे तेल-गैस की लागत बढ़ने से दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक अस्थिरता से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ सकता है, फ्यूल की कीमतें बढ़ सकती हैं और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर महंगाई का नया दबाव पड़ सकता है।
बातचीत पर जोर दे रहे पश्चिमी देश
पश्चिम एशिया के देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने से रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशें जारी रखी हैं। अधिकारियों ने आगे की अस्थिरता से बचने के लिए बार-बार संयम और बातचीत के महत्व पर जोर दिया है।
अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिनों के सीजफायर का एलान हुआ था, लेकिन ये समझौता एक महीने भी नहीं चल सका।
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