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ऑस्ट्रेलिया में भारतीय योग शिक्षकों को लेकर विवाद, विपक्ष का आरोप- मजदूर से ज्यादा है संख्या

Published: Tue, 22 Sep 2026 12:26 PM (IST)

ऑस्ट्रेलिया में इमिग्रेशन और वीजा नियमों पर बहस तेज हो गई है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय छात्रों और वीजा हॉपिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है।

ऑस्ट्रेलिया के इमिग्रेशन और गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क(फोटो: सोशल मीडिया)

ऑस्ट्रेलिया के इमिग्रेशन और गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क(फोटो: सोशल मीडिया)

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डिजिटल डेस्क, कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया में इमिग्रेशन और वीजा नियमों को लेकर बहस काफी तेज हो गई है। इसका मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय छात्रों, अस्थायी वीजा और वीजा हॉपिंग पर है। देश के आव्रजन और गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने एक भाषण में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाने वाले आव्रजन का पूरी तरह समर्थन करती है।

हालांकि, वे इस पूरी व्यवस्था पर बेहतर नियंत्रण चाहते हैं ताकि इसका दुरुपयोग न हो। इसी दौरान उन्होंने विपक्ष के उन दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार कंस्ट्रक्शन वर्कर्स से ज्यादा योग शिक्षकों को देश में ला रही है।

मंत्री ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले वित्त वर्ष में करीब 15,000 निर्माण श्रमिकों को वीजा दिया गया, जो पिछली बार से तीन गुना ज्यादा है।

वहीं, मौजूदा सरकार ने अब तक एक भी योग शिक्षक को वीजा नहीं दिया है। योग शिक्षकों का जिक्र व्यावसायिक सूची में इसलिए है क्योंकि पिछली सरकार ने भारत के साथ व्यापारिक समझौता किया था, जिसमें सालाना 1,800 योग शिक्षकों और शेफ को अस्थायी वीजा देने का प्रावधान है।

'वीजा हॉपिंग' पर रोक के साथ छात्रों के लिए बदले नियम

सरकार की सबसे बड़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय छात्रों द्वारा अपनाई जाने वाली वीजा हॉपिंग की प्रवृत्ति को लेकर है। टोनी बर्क ने स्पष्ट किया कि एक वीजा से दूसरे वीजा में जाना हमेशा गलत नहीं होता।

अगर कोई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करता है, काम का अनुभव लेता है और फिर सही तरीके से पीआर यानी स्थायी निवास हासिल करता है, तो यह एक वैध तरीका है।

लेकिन, समस्या उन लोगों से है जो पीआर के योग्य न होने के बावजूद, सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में लंबे समय तक रुकने के लिए बार-बार कोर्स और वीजा बदलते रहते हैं।

इस पर नकेल कसने के लिए अब सरकार ने तय किया है कि छात्रों को अपनी शैक्षणिक योग्यता का स्तर बढ़ाना यानी जैसे बैचलर के बाद मास्टर करना होगा, न कि सिर्फ वीजा बढ़ाने के लिए एक ही स्तर के अलग-अलग कोर्स में दाखिला लेना होगा।

परिवार को साथ लाने पर पाबंदी

नए प्रस्तावित बदलावों के तहत अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों और ग्रेजुएट वीजा धारकों के लिए अपने परिवार को ऑस्ट्रेलिया लाना आसान नहीं होगा। सामान्य तौर पर परिवार के सदस्यों को साथ लाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, जो परिवार पहले से ऑस्ट्रेलिया में हैं, उन्हें अलग नहीं किया जाएगा।

पीएचडी करने वाले छात्रों और कुछ खास देशों के छात्रों को इस नियम में छूट दी जाएगी। चूंकि भारत इन समूहों में नहीं आता, इसलिए भारतीय छात्रों पर इस नियम का सीधा असर पड़ेगा।

2026 के शुरुआती पांच महीनों के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले कुल विदेशी छात्रों में से 16% भारतीय हैं। चीन के बाद भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।

ऐसे में वीजा नियमों में होने वाली ये सख्ती वहां पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

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