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बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति बने मिर्जा फखरुल इस्लाम, 35 साल बाद इस चुनाव में अलग क्या हुआ?

Updated: Thu, 20 Aug 2026 06:50 PM (IST)

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश का नया राष्ट्रपति चुना गया है।

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (सोशल मीडिया)

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (सोशल मीडिया)

HighLights

  1. मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति चुने गए।

  2. उन्हें 255 वोट मिले, प्रतिद्वंद्वी ओली अहमद को 88।

  3. बांग्लादेश में 35 साल बाद हुआ यह मुकाबला।

डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय से राष्ट्रपति पद को लेकर चल रही खींचातानी पर अब ब्रेक लग गया है। इसकी वजह है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश का नया राष्ट्रपति चुन लिया गया है।

बांग्लादेशी संसद भवन में हुए चुनाव में इस्लाम आलमगीर को कुल 255 वोट मिले। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी ओली अहमद को 88 वोट मिले, जिन्हें कई विपक्षी दलों के गठबंधन का समर्थन प्राप्त था। मुख्य चुनाव आयोग की देखरेख में हुई इस वोटिंग प्रक्रिया के बाद उनकी जीत की आधिकारिक घोषणा की गई।

35 साल बाद हुआ मुकाबला

बांग्लादेश में यह चुनाव राजनीतिक रूप से बेहद खास रहा, क्योंकि करीब 35 साल बाद देश के राष्ट्रपति पद के लिए एक से ज्यादा उम्मीदवारों के बीच मुकाबला देखने को मिला है।

इससे पहले 1991 में राष्ट्रपति पद के लिए इस तरह से मतदान हुआ था। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बीएनपी के महासचिव पद और पार्टी की राष्ट्रीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया था।

समझिए नए राष्ट्रपति चुनने की क्यों पड़ी जरूरत?

बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह चुनाव कराना जरूरी हो गया था।

बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक, राष्ट्रपति का पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर संसद द्वारा नए राष्ट्रपति का चुनाव किया जाना अनिवार्य होता है। निर्धारित समय सीमा के भीतर ही इस चुनाव को संपन्न कराया गया है।

साधारण कार्यकाल और संवैधानिक भूमिका

गौर करने वाली बात यह है कि बांग्लादेश में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक होता है, जबकि देश की असली कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार के पास होती हैं।

ऐसे में बीएनपी के लंबे समय तक संगठन को संभालने वाले नेता मिर्जा फखरुल का अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचना बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।