तिब्बत में आपदा की तस्वीरें और वीडियो हटवा रहा चीन, मौतों के आंकड़ों पर भी सेंसरशिप
तिब्बत और नेपाल में आई विनाशकारी आपदा के बीच जहां दोनों देशों में राहत और बचाव अभियान जारी है, वहीं ...और पढ़ें

चीनी सेंसर इंटरनेट मीडिया से आपदा की तस्वीरें और वीडियो हटा रहे हैं। (फोटो- रॉयटर)
HighLights
पत्रकारों और इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसरों को आधिकारिक घोषणा तक मृतकों पर रिपोर्टिंग से रोका
नेपाल में स्वतंत्र रिपोर्टिंग और तिब्बत में पाबंदी से चीन की सूचना नीति पर उठे सवाल
न्यूयॉर्क टाइम्स, न्यूयॉर्क। तिब्बत और नेपाल में आई विनाशकारी आपदा के बीच जहां दोनों देशों में राहत और बचाव अभियान जारी है, वहीं तिब्बत में आपदा से जुड़ी सूचनाओं पर चीन ने सख्त पहरा लगा दिया है।
चीनी सेंसर इंटरनेट मीडिया से आपदा की तस्वीरें और वीडियो हटा रहे हैं। सरकारी मीडिया के पत्रकारों और इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसरों को भी आधिकारिक घोषणा होने तक मृतकों और लापता लोगों की संख्या की रिपोर्टिंग नहीं करने की हिदायत दी गई है।
आपदा के बाद चीन में अधिकारियों ने उन लोगों पर भी कार्रवाई की है, जिन्होंने मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट किए। प्रशासनिक कार्रवाई में जुर्माना और हिरासत जैसे कदम शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में 150 डॉलर तक का जुर्माना या 10 दिन तक की हिरासत का प्रविधान लागू किया गया है।
नेपाल और तिब्बत में आपदा की कवरेज के तरीके में बड़ा अंतर भी सामने आया है। नेपाल में विदेशी पत्रकार प्रभावित इलाकों में जाकर स्थानीय लोगों और परिवारों से बातचीत कर रहे हैं, जबकि तिब्बत में विदेशी पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग की अनुमति नहीं है। चीन सरकार इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण अटकलें बताकर खारिज करती रही है।
तिब्बत लंबे समय से चीन के लिए संवेदनशील क्षेत्र रहा है। वहां राजनीतिक असंतोष और विरोध प्रदर्शनों का इतिहास रहा है। ऐसे में आपदा के दौरान स्वतंत्र तस्वीरों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और स्थानीय लोगों की रिपोर्टिंग से चीन के सामने सूचना नियंत्रण की चुनौती और बढ़ गई है।
सरकारी मीडिया में राहत अभियान की तस्वीरें
मंगलवार को तिब्बत के गिरोंग काउंटी में आधिकारिक शोक सभाएं हुईं। सरकारी मीडिया ने सड़कों से मलबा हटाते कर्मचारियों, पुलिस अधिकारियों, चिकित्सकों और आपातकालीन कर्मियों की तस्वीरें प्रसारित कीं।
सरकारी पीपल्स डेली ने अपने एक लेख में बचाव अभियान में कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं और सदस्यों की भूमिका को प्रमुखता दी। हालांकि, सरकारी कवरेज में घायलों, मृतकों और उनके परिवारों की तस्वीरें काफी हद तक नजर नहीं आईं।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्र में खोज, बचाव और आपात राहत अभियान तेजी और व्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चीन की ओर से दी जा रही जानकारी सार्वजनिक, पारदर्शी और समय पर है।
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच की एशिया मामलों की डिप्टी डायरेक्टर माया वांग के अनुसार, चीनी सरकारी मीडिया के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को बचे हुए लोगों या उनके परिवारों के इंटरव्यू लेने से भी रोका गया।
उन्होंने कहा कि सत्तावादी सरकारें सवालों और जवाबदेही की मांग से सबसे ज्यादा चिंतित रहती हैं और इसलिए सूचनाओं तथा असहमत आवाजों को नियंत्रित करती हैं।
इंटरनेशनल कैंपेन फार तिब्बत ने दावा किया है कि तिब्बत में बाढ़ से हुई तबाही का वास्तविक पैमाना सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकता है। संगठन के अनुसार, चीन ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि तिब्बत की ओर कौन-कौन से गांव प्रभावित हुए हैं।
संगठन ने जमीनी सूत्रों के हवाले से कहा कि साले, सेरचुंग, लाबी और रिजी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं। वहां करीब 300 घर नष्ट होने और कई लोगों के अब भी लापता होने की बात कही गई है।
संगठन के कार्यकारी निदेशक रयान फियोरेसी ने कहा कि कुछ बचे लोगों को गिरोंग शहर ले जाया गया है और उन्हें कड़ी सुरक्षा व निगरानी में रखा जा रहा है।
उनके मुताबिक, तिब्बत से बिना रोक-टोक आने वाली सूचनाएं चीन के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकती हैं, क्योंकि इससे तिब्बत की छवि और वहां के शासन को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी के सूचना नियंत्रण को चुनौती मिल सकती है।
