डेस्टिनेशन अर्थ से जलवायु और मौसम के बदलते प्रभाव को समझने में मिलेगी मदद, दुनिया को होगा कितना फायदा?
यूरोपियन यूनियन ने 'डेस्टिनेशन अर्थ' नामक परियोजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी का डिजिटल मॉडल बनाना है। यह परियोजना 2022 में शुरू हुई और जून 202 ...और पढ़ें

डेस्टिनेशन अर्थ प्रोजेक्ट। (फोटो-ईएसए)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूरोपियन यूनियन ने पृथ्वी का डिजिटल मॉडल बनाने के लिए अनोखी पहल शुरू की है। इसे डेस्टिनेशन अर्थ नाम दिया गया है। साल 2022 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब अपने तीसरे चरण में पहुंचने वाला है, जो जून 2026 से जून 2028 तक चलेगा। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य मौसम, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं को पहले से ज्यादा सटीक तरीके से समझना और उनका अनुमान लगाना है।
डेस्टिनेशन अर्थ यूरोपियन यूनियन की वैज्ञानिक पहल है। इसके तहत पृथ्वी का एक डिजिटल ट्विन तैयार किया जा रहा है। यह सुपर कंप्यूटर पर बना पृथ्वी का डिजिटल प्रतिरूप है। इसमें पृथ्वी के वायुमंडल, समुद्र, जमीन और मौसम से जुड़ी हर गतिविधि को कंप्यूटर पर हूबहू उतारने की कोशिश की जा रही है।
यूरोपियन यूनियन कर रही प्रोजेक्ट को फंड
इस प्रोजेक्ट को यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्ट के नेतृत्व में चलाया जा रहा है और इसे यूरोपियन यूनियन फंड कर रही है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाएं भविष्य में किस तरह असर डालेंगी, जिससे सरकारें और संस्थान पहले से तैयारी कर सकें।
डेस्टिनेशन अर्थ फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके जरिए यूरोप के शहरों में अर्बन हीट मैप, वायु प्रदूषण की निगरानी, जंगल की आग, बाढ़ और सूखे की पहले से चेतावनी दी जा रही है। ऊर्जा के क्षेत्र में ही इसका इस्तेमाल हो रहा है।
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कैसे काम करता है डेस्टिनेशन अर्थ?
डेस्टिनेशन अर्थ में सुपर कंप्यूटर और एआई की मदद ली जा रही है। पूरी पृथ्वी को एक थ्री डी ग्रिड में बांटा गया है, जहां हर बिंदु के बीच की दूरी करीब 5 किलोमीटर है। इसका मतलब यह है कि मौसम और जलवायु से जुड़ी छोटी सी छोटी गतिविधि को भी बहुत बारीकी से देखा और समझा जा सकता है।
क्या होगा असर?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेस्टिनेशन अर्थ का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकारें और प्रशासन प्राकृतिक आपदाओं के लिए पहले से तैयार हो सकेंगे। बेहतर मौसम पूर्वानुमान से जान और माल का नुकसान कम किया जा सकेगा।