हिंसा की आग में क्यों जल रहा फ्रांस? सुपरमार्केट में लूटपाट, ऐतिहासिक इमारतें तबाह; सड़कों पर मलबा
फ्रांस में महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद रविवार को तनावपूर्ण शांति रही। ...और पढ़ें
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फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों से मचा हाहाकार (फोटो-रॉयटर्स)

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। महंगाई, बढ़ती असमानता और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट के खिलाफ फ्रांस में शनिवार को हिंसक प्रदर्शन के बाद रविवार को तनावपूर्ण शांति रही। राजधानी पेरिस के अलावा मार्सेय, ल्योन, बोर्डो, रीम्स, स्ट्रासबुर्ग, ग्रेनोबल, नीस और लिमोज समेत कई शहरों में हर तरफ दुकानों, सार्वजनिक संपत्तियों, ऐतिहासिक स्थानों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट के निशान साफ नजर आ रहे थे।
लिमोन शहर 143 साल पुरानी सिटी हाल की ऐतिहासिक इमारत से रविवार को भी धुआं उठता देखा गया। अनुमान के मुताबिक देशभर में पांच लाख से अधिक लोगों के सड़कों पर उतरे।
गृह मंत्री के अनुसार, दो हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और 600 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। पेरिस में एक प्रदर्शनकारी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। हिंसा के बाद रविवार को कई शहरों में सफाई और नुकसान का आकलन शुरू हुआ।
रॉयटर्स के अनुसार, लिमोज शहर के मेयर गिलाउम गेरां ने बताया कि ऐतिहासिक सिटी हाल की इमारत का ज्यादातर हिस्सा आग से नष्ट हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इमारत को जलाने की योजना पहले से बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि घटना के दौरान भीतर मौजूद लोगों को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ। मरम्मत के लिए जरूरी धन नहीं मिलने पर उन्होंने इस्तीफा देने की बात भी कही।
बोर्डो में नकाबपोश प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रीफेक्ट के आवास में घुस गए। शहर के मेयर तोमा काजेनाव के मुताबिक, करीब 100 दुकानों में लूटपाट हुई। यहां लुई विटन के स्टोर को भी निशाना बनाया गया, जबकि लिली में एपल के एक स्टोर में तोड़फोड़ की गई।
एपी के अनुसार, सुपरमार्केट कंपनी कैरफोर के सीईओ अलेक्जांद्र बोम्पार ने बताया कि कंपनी की 50 दुकानें क्षतिग्रस्त हुईं और 20 में लूटपाट की गई। नुकसान लाखों यूरो में होने का अनुमान है। मार्सेय के मेयर ने प्रभावित कारोबारियों के लिए आपात वित्तीय सहायता की घोषणा की।
रविवार सुबह पेरिस के प्लेस द ला रेपब्लिक और आसपास के इलाकों में उखड़े पत्थर, टूटे शीशे और बिखरा मलबा हिंसा के निशान छोड़ गए। कई पर्यटक और खरीदारी वाले इलाकों में भी दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया। एक डच उद्यमी ने हालात को युद्ध क्षेत्र जैसा बताते हुए कहा कि उन्हें शनिवार को अपना होटल छोड़ना पड़ा।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार ने हिंसा के लिए अतिवामपंथी समूहों और आपराधिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है। प्रदर्शन स्कूलों की स्थिति और शिक्षकों की कमी से शुरू हुए थे, लेकिन बाद में महंगाई, असमानता और सार्वजनिक खर्च में कटौती के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि वहां अक्सर क्रांति होती है और अमेरिका को भी इसमें शामिल होना चाहिए।
अल्बानिया और बेल्जियम में भी हिंसा
एएनआइ के अनुसार, अल्बानिया में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्र नेतृत्व वाला आंदोलन लगातार छठे दिन हिंसक रहा। राजधानी तिराना में सरकारी इमारतों और अन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। रविवार को शिक्षा मंत्रालय के बाहर पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियां चलाईं। प्रधानमंत्री ईडी रामा ने इस्तीफे की मांग खारिज कर दी।
बेल्जियम के ब्रुसेल्स और लीज में भी प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़पें हुईं। पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर बोतलें और अन्य वस्तुएं फेंकीं।
