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    आपके जीन में ही छुपा है लंबी उम्र का राज, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

    Updated: Tue, 03 Feb 2026 11:26 PM (IST)

    एक नए अध्ययन से पता चला है कि लंबी उम्र का रहस्य 50-55% तक हमारे जीनों में छिपा है, जो पहले के 20-25% के अनुमान से काफी अधिक है। शोधकर्ताओं का कहना है ...और पढ़ें

    लंबी उम्र में जीनों का योगदान 50-55% तक होता है।

    लंबी उम्र में जीनों का योगदान 50-55% तक होता है।

    HighLights

    1. लंबी उम्र में जीनों का योगदान 50-55% तक होता है।

    2. पर्यावरणीय सुधारों से आनुवंशिक प्रभाव अब अधिक स्पष्ट।

    3. जीवनकाल में आधा बदलाव अभी भी पर्यावरण, जीवनशैली पर निर्भर।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नियमित व्यायाम से लेकर सख्त आहार तक, कुछ लोग लंबी उम्र पाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने आखिरकार लंबी उम्र का रहस्य उजागर कर दिया है। अध्ययन के अनुसार लंबी उम्र का राज काफी हद तक (50-55 प्रतिशत) हमारे जीन में निहित है।

    पहले यह माना जाता था कि जीवनकाल का केवल 20 से 25 प्रतिशत ही आनुवंशिकी पर निर्भर करता है, जबकि शेष जीवनशैली और पर्यावरण पर आधारित होता है। आंतरिक कारणों से होती हैं अधिकांश मौतें: शोधकर्ताओं के अनुसार, पिछले अनुमानों में डाटा के अभाव की वजह से मृत्यु के कारणों में समय के साथ आए बदलावों को ध्यान में नहीं रखा गया था।

    एक सदी पहले, कई लोग उन कारणों से मरते थे जिन्हें विज्ञानी बाहरी कारण कहते हैं जैसे दुर्घटनाएं, संक्रमण और अन्य बाहरी खतरे। आज, कम से कम विकसित देशों में, अधिकांश मौतें आंतरिक कारणों से होती हैं। बढ़ती उम्र, डिमेंशिया और हृदय रोग जैसी उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण शरीर धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है।

    अचानक शक्तिशाली हो गए हैं जीन?

    विज्ञानियों का कहना है कि जीन अचानक अधिक शक्तिशाली नहीं हुए हैं। जो बदला है वह हमारा पर्यावरण है। उदाहरण के लिए, सौ साल पहले किसी व्यक्ति की लंबाई उसके पोषण और बचपन की बीमारियों पर निर्भर करती थी।

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    आज, समृद्ध देशों में अधिकांश लोगों को पर्याप्त पोषण मिलता है, जिससे आनुवंशिक अंतरों का प्रभाव अधिक स्पष्ट हो गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि पोषण का महत्व समाप्त हो गया है, बल्कि इसलिए कि अधिकांश लोग अब अपनी आनुवंशिक क्षमता तक पहुंच जाते हैं।

    यही सिद्धांत जीवनकाल पर भी लागू होता है। जैसे-जैसे हमने टीकाकरण में सुधार किया है, प्रदूषण कम किया है, आहार को बेहतर बनाया है और स्वस्थ जीवनशैली अपनाई है, हमने पर्यावरणीय कारकों के समग्र प्रभाव को कम किया है।

    जीन और पर्यावरण दोनों का महत्व

    शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि अंतत:, जीन और पर्यावरण दोनों ही मायने रखते हैं। लेखकों ने स्वीकार किया है जीवनकाल में होने वाले लगभग आधे बदलाव अभी भी पर्यावरण, जीवनशैली, स्वास्थ्य देखभाल और अनियमित जैविक प्रक्रियाओं पर निर्भर करते हैं।

    विभिन्न आनुवंशिक कारक विभिन्न वातावरणों के साथ किस प्रकार परस्पर क्रिया करते हैं, इसे समझकर संभवत: इस बात को समझा जा सकता है कि कुछ लोग दूसरों की तुलना में अधिक समय तक क्यों जीवित रहते हैं।