विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

नेपाल में आपदा से बची महिलाओं और बच्चों की सेहत पर खतरा, राहत शिविरों में भोजन और स्वच्छता का संकट

Published: Sun, 06 Sep 2026 09:00 PM (IST)Updated: Sun, 06 Sep 2026 09:19 PM (IST)

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से बचे लोगों, खासकर गर्भवती महिलाओं, नई माताओं और नवजात शिशुओं को राहत शिविरों में ...और पढ़ें

नेपाल बाढ़ आपदा के बाद महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए स्वास्थ्य संकट गहराया (फोटो-रॉयटर्स)

नेपाल बाढ़ आपदा के बाद महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए स्वास्थ्य संकट गहराया (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. राहत शिविरों में गर्भवती महिलाओं, माताओं को भोजन-स्वच्छता का संकट।

  2. क्षतिग्रस्त सड़कें, स्वास्थ्य केंद्र मातृ सेवाओं तक पहुंच बाधित।

  3. निजता की कमी से महिलाओं के खिलाफ हिंसा का खतरा बढ़ा।

डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल की भयावह बाढ़ और भूस्खलन से बच निकलना ही महिलाओं और नवजात बच्चों की मुश्किलों का अंत नहीं है। अब अस्थायी शिविरों में गर्भवती महिलाओं, प्रसव के बाद की माताओं और नवजातों के सामने भोजन, स्तनपान, स्वच्छता, निजता और इलाज तक पहुंच का संकट खड़ा हो गया है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के ताजा आकलन के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रजनन आयु की करीब 98,560 महिलाएं हैं, जिनमें लगभग 5,030 गर्भवती हैं।

क्षतिग्रस्त सड़कें, स्वास्थ्य केंद्र और परिवहन व्यवस्था प्रसव और आपातकालीन मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मुश्किल बना रही हैं।

रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत प्रभावित इलाकों में यह संकट जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है। त्रिशूली अस्पताल में बाढ़ के बाद अब तक नौ प्रसव हो चुके हैं। गर्भवती महिलाएं बुखार, भ्रूण की कम हलचल और मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं के साथ पहुंच रही हैं। अस्पताल में बिजली की आपूर्ति अनियमित है और आपरेशन के लिए जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उपकरणों को भी सीमित संसाधनों में स्टरलाइज करना पड़ रहा है।

सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से काठमांडू तक पहुंचने में लगने वाला समय भी कई गुना बढ़ गया है। अस्पताल में गंभीर हालत वाले नवजातों के लिए उन्नत नवजात देखभाल इकाई भी उपलब्ध नहीं है।राहत शिविरों में समस्या सिर्फ इलाज की नहीं है।

स्तनपान कराने वाली माताओं को पर्याप्त और उपयुक्त भोजन नहीं मिल रहा। कुछ शिविरों में नवजातों को भी वही सामान्य भोजन देने की शिकायत सामने आई है जो वयस्कों को दिया जा रहा है। मांओं के लिए स्तनपान कराने की निजी जगह तक उपलब्ध नहीं है।चंद्रवती सेकेंडरी स्कूल में बने एक आश्रय केंद्र में 1,000 से ज्यादा विस्थापित लोग रह रहे हैं, जिनमें करीब 500 महिलाएं हैं।

महिला अधिकार संगठन डब्ल्यूओआरईसी के मुताबिक, यहां मासिक धर्म वाली किशोरियों को पर्याप्त सैनिटरी पैड नहीं मिल रहे। महिलाओं के नहाने, कपड़े सुखाने और बच्चों को स्तनपान कराने के लिए अलग जगह भी नहीं है। संगठन का कहना है कि आपदा की स्थिति में निजता कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं की बुनियादी जरूरत है।

यूएनएफपीए ने भी चेताया है कि भीड़भरे और असुरक्षित आश्रय, निजता की कमी और लैंगिक आधार पर अलग सुविधाओं का अभाव महिलाओं और किशोरियों के खिलाफ हिंसा, शोषण और तस्करी का जोखिम बढ़ा सकता है। राहत के तहत एजेंसी ने हजारों महिलाओं और किशोरियों को डिग्निटी किट और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की पहल की है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)