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    भारत की सीमा से लगे से लगे इन चार देशों का पासपोर्ट सबसे कमजोर, देखें ताजा रैंकिंग

    Updated: Sat, 17 Jan 2026 09:08 AM (IST)

    हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की रैंकिंग जारी हो गई है। इसमें भारत 80वें स्थान पर है, जो पिछले साल से पांच पायदान ऊपर है। रिपोर्ट में एशिया के 9 देश सबस ...और पढ़ें

    दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट (फाइल फोटो)

    दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स हर साल पासपोर्ट रैंकिंग जारी करता है। इस रैंकिंग से ये पता चलता है कि किस देश का पासपोर्ट आपको दुनियाभर में घूमने की कितनी आजादी देता है। इस रैंकिंग से यह भी पता चलता है कि आप कितने देशों की यात्रा बिना वीजा के कर सकते हैं।

    हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की रैंकिंग इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) के आंकड़ों पर आधारित है। 2026 की रैंकिंग भी जारी कर दी गई है, जो फिर एक बार मजबूत और कमजोर पासपोर्ट के बारे में जानकारी देती है।

    दुनिया का सबसे कमजोर पासपोर्ट

    हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की रैंकिंग में सबसे कमजोर पासपोर्ट की टॉप 10 लिस्ट में एशिया के ही 9 देशों के नाम शामिल हैं। इस लिस्ट में शामिल केवल सोमालिया ऐसा देश है, जो अफ्रीका का सबसे पूर्वी देश है। सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के बारे में जानते हैं। इस लिस्ट में चार ऐसे देशों के नाम शामिल हैं, जिनकी सीमा भारत से लगती है- बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान।य़ 

    • उत्तर कोरिया
    • फिलिस्तीनी क्षेत्र
    • बांग्लादेश
    • नेपाल
    • सोमालिया
    • पाकिस्तान
    • यमन
    • इराक
    • सीरिया
    • अफगानिस्तान

    किस नंबर पर भारत?

    हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 80वें नंबर पर है। भारतीय पासपोर्ट रखने वाले लोग 55 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल जा सकते हैं। 2025 में भारत इस लिस्ट में 85वें नंबर पर था। भारत ने पिछले साल की तुलना में पांच नंबर की बढ़त हासिल की है। लेकिन देखा जाए तो भारत ग्लोबल औसत से अभी भी काफी नीचे है और बेहतर अर्थव्यवस्था वाले देशों से काफी पीछे है।

    कमजोर पासपोर्ट होने से नुकसान

    • ज्यादातर इंटरनेशनल ट्रिप्स के लिए पहले से वीजा के लिए आवेदन करना होता है, क्योंकि बिना वीजा के अचानक या कम समय में यात्रा करना मुश्किल हो जाता है।
    • लंबी यात्राओं के लिए के वीजा अपॉइंटमेंट, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है, जिससे लोगों को इसके लिए प्लानिंग कई महीनों पहले से करनी पड़ती है।
    • एप्लीकेशन फी, दूतावास या वाणिज्य दूतावास की यात्रा और अतिरिक्त पेपर वर्क से यात्रा की कुल लागत में काफी इजाफा हो जाता है।

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