नेपाल की अर्थव्यवस्था को बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई करना होगा मुश्किल, पर्यटन पर भी असर की आशंका
नेपाल सरकार का अनुमान है कि हालिया बाढ़ से देश को लगभग पांच अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। यह देश के वार्षिक आर्थिक उत्पादन का दसवां हिस्सा है।

नेपाल की अर्थव्यवस्था को बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई करना होगा मुश्किल (फोटो- रॉयटर)
HighLights
विदेश में काम करने वाले नेपालियों से आता है आर्थिकी का सबसे बड़ा हिस्सा
बाढ़ से पनविद्युत परियोजनाओं को पहुंचा नुकसान, पर्यटन पर भी असर की आशंका
न्यूयॉर्क टाइम्स, नई दिल्ली। नेपाल सरकार का अनुमान है कि हालिया बाढ़ से देश को लगभग पांच अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। यह देश के वार्षिक आर्थिक उत्पादन का दसवां हिस्सा है। यह उस देश पर एक नया बोझ है जिसने पनविद्युत संयंत्रों पर भारी निवेश किया था, जो अब नष्ट हो चुके हैं।
नेपाल अभी भी 2015 के भूकंप से हुए नुकसान की भरपाई कर रहा है और उसे अरबों डॉलर आसानी से नहीं मिलते। नेपाल की आर्थिकी का सबसे बड़ा हिस्सा (कुल मूल्य का एक चौथाई से अधिक) विदेश में काम करने वाले नेपालियों से आता है।
अधिकतर लोग महीने में 400 डॉलर से भी कम कमाते हैं और जितना संभव हो, घर भेज देते हैं। बाढ़ से उनकी कमाई पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन नेपाल की आर्थिकी के अन्य घटक, खासकर पनविद्युत संयंत्र और पर्यटन सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
नेपाल में नुकसान के निशान भोटेकोशी और त्रिशूली घाटियों में फैले हुए हैं। बिजली की लाइनें और सेल टावर गायब हो गए हैं। पूरे गांव और चावल के खेत मिनटों में गाद से भर गए हैं। इस वर्ष की शुरुआत में सत्ता में आई नई सरकार पर आर्थिक समस्याओं का बोझ बहुत अधिक है।
2015 में आए भूकंप से नेपाल को नौ अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। तब से 11 वर्षों में सरकार की कुल उधारी लगभग दोगुना हो गई है, जो उसकी आर्थिकी के 26 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई है।
अब सरकार के कुल खर्च का लगभग 19 प्रतिशत कर्ज और ब्याज चुकाने में जाता है। नेपाली रुपये का कमजोर होना भी इसके लिए जिम्मेदार है क्योंकि देश की आयात जरूरत, उसकी निर्यात क्षमता से अधिक है।
तीन करोड़ की आबादी वाला नेपाल अभी भी अधिकतर खेती पर निर्भर है। उत्पादक रोजगार के अभाव में हर साल छह लाख नेपाली बेहतर जिंदगी की तलाश में विदेश जाते हैं।
काठमांडू एयरपोर्ट का डिपार्चर बोर्ड कतर, सऊदी अरब, मलेशिया और दूसरे देशों के लिए रोजाना आने वाली उड़ानों से भरा रहता है, लेकिन वहां से पर्यटक बहुत कम आते हैं।
ये नेपाली जो पैसा घर भेजते हैं, उससे काठमांडू घाटी के आसपास अधिकतर कंस्ट्रक्शन और कंज्यूमर खर्च होता है। बदले में इससे कीमतें बढ़ जाती हैं और प्रतिस्पर्धी उद्योगों के लिए फलने-फूलना मुश्किल हो जाता है।
विदेश से नेपालियों के भेजे पैसे पर निर्भरता कम करने के लिए देश पनविद्युत परियोजनाओं में निवेश कर रहा है, ताकि बिजली की बिक्री की जा सके। लेकिन यह रास्ता भी सैकड़ों मजदूरों के साथ बह गया।
बाढ़ ने 14 पनविद्युत परियोजनाओं को तबाह कर दिया या नुकसान पहुंचाया है। नेपाल की तीसरी सबसे बड़ी कमाई के माध्यम पर्यटन पर भी बाढ़ का असर पड़ने का खतरा है।
