परिवार और खुद में से किसी एक को चुनना था, नेपाली नागरिक ने बताया बाढ़ का आंखों देखा हाल
नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने 1000 से अधिक लोगों की जान ले ली है और हजारों लापता हैं, जिससे कई परिवार तबाह हो गए हैं।
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नेपाल बाढ़ में उजड़ गए कई परिवार (फोटो-पीटीआई)
HighLights
नेपाल बाढ़ में 1000 से अधिक लोगों की मौत।
हजारों लोग अभी भी लापता, कई परिवार तबाह।
पूर्णा बहादुर घाले ने बयां की भयावह आपबीती।
डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल में ऐसी बाढ़ आई, जिसने कई लोगों की जिंदगी तबाह कर दी। इस आपदा में अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं। वहीं अभी भी हजारों लोग लापता हैं। इस बाढ़ में कई लोगों ने अपने पूरे परिवार को खो दिया।
नेपाल में जब ये बाढ़ आई, तब लोगों के पास ये सोचने का भी वक्त नहीं था कि वे क्या करें। इस बाढ़ में लोग ये सोचने को मजबूर हो गए कि पहले खुद की जान बचाएं या परिवार की। इस आपदा से जिन लोगों को बचा लिया गया है, वे अभी भी अपनों की तलाश में बैठे हैं।
जिंदगी और मौत के बीच कुछ सेकंड का फासला
नेपाल त्रासदी की आंखों-देखी घटना के बारे में एक शख्स ने जो आपबीती बताई, उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाएगी। उत्तरगया ग्रामीण नगर पालिका के 43 वर्षीय कार्यकारी सदस्य पूर्णा बहादुर घाले बाजार में थे, जब 26 अगस्त को रसुवा में भोटेकोशी नदी बस्तियों में घुस गई।
बाढ़ को देखते हुए किसी ने चिल्लाकर कहा कि सभी को भाग जाना चाहिए। घाले ऐसे में पहले अपने घर की ओर भागे। उनका गांव बाजार से तीन किलोमीटर दूर था, लेकिन जब तक वे पहुंचे, बाढ़ आ चुकी थी। वह मुश्किल से अपनी जान बचा पाए।
पूर्णा बहादुर घाले ने काठमांडू पोस्ट को बताया, 'कुछ सेकंड ने ही जिंदगी और मौत के बीच का फर्क तय किया।' अब वे लहरेपौवा के शिवालय बेसिक स्कूल में बने होल्डिंग सेंटर में शरण लिए हुए घाले यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे क्या हुआ। उनके परिवार के सात सदस्य लापता हैं।
अपने परिवार के बारे में बात करते हुए घाले ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि वे जिंदा हैं या नहीं, और न ही यह पता है कि उनके शव कहां हैं। मेरे सात रिश्तेदार बाढ़ की चपेट में आ गए थे।'
घाले ने बाढ़ में कैसे बचाई अपनी जान?
बाढ़ से बचने के लिए घाले भागकर जंगल की ओर ऊंचाई पर चले गए और वहां दो दिन बिताए। तीसरे दिन, शुक्रवार को, नेपाली सेना के एक हेलीकॉप्टर ने उन्हें बचाया और पड़ोसी नुवाकोट के बिदुर पहुंचाया। रविवार को उन्हें उत्तरगया में बने होल्डिंग सेंटर में शरण दी गई है।
घाले ने बाढ़ के हालात के बारे में बताते हुए कहा, 'वार्ड 1 को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। जो लोग दूसरों को सुरक्षित स्थान पर भागने के लिए कह रहे थे, वे खुद ही बह गए।'
खल्ते, गोगने, तिरु और करमारंग गांवों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। नदी के किनारे शव मिलने लगे हैं, कई शव इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल है।
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