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बदल जाएगा दुनिया का मानचित्र, संयुक्त राष्ट्र ने अफ्रीका के असली आकार वाले नक्शे को दी मंजूरी

Published: Sat, 05 Sep 2026 06:56 AM (IST)

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को 16वीं सदी के मर्केटर ग्लोबल मैप को छोड़कर देशों के असली आकार को ज्यादा ...और पढ़ें

संयुक्त राष्ट्र ने अफ्रीका के असली आकार वाले नक्शे को दी मंजूरी (फोटो- रॉयटर)

संयुक्त राष्ट्र ने अफ्रीका के असली आकार वाले नक्शे को दी मंजूरी (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. संयुक्त राष्ट्र ने अफ्रीका के असली आकार को दिखाने वाले नक्शे के समर्थन में प्रस्ताव मंजूर किया

  2. यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में 164 के मुकाबले एक के बहुमत से पारित हुआ

रॉयटर, न्यूयॉर्क। बचपन से हम किताबों में दुनिया का जो नक्शा देखते आए हैं, अब उसे बदलने की तैयारी की जा रही है। विश्व का एक ऐसा नक्शा अपनाने की बात चल रही है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार जमीन पर उनके असली आकार के अनुपात में दिखे।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को 16वीं सदी के मर्केटर ग्लोबल मैप को छोड़कर देशों के असली आकार को ज्यादा सही ढंग से दिखाने वाले नक्शे को अपनाने के पक्ष में वोट दिया।

अफ्रीकी देशों ने यह प्रस्ताव इसलिए पेश किया था, ताकि इस सोच को बदला जा सके कि यह महाद्वीप हाशिये पर है। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में 164 के मुकाबले एक के बहुमत से पारित हुआ।

प्रस्ताव का विरोध करने वाला एकमात्र देश अमेरिका था। छह देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। टोगो ने मर्केटर मानचित्र के उपयोग को सीमित करने के लिए अफ्रीकी संघ के अभियान को आगे बढ़ाने की पहल की।

यह नक्शा जमीन के हिस्सों के आकार को सही नहीं दिखाता। यह ध्रुवों के पास वाले हिस्सों को बड़ा करके दिखाता है। इसकी वजह से ग्रीनलैंड लगभग अफ्रीका जितना ही बड़ा दिखता है, जबकि असल में अफ्रीका उससे करीब 14 गुना बड़ा है।

मर्केटर मानचित्र का दुनियाभर में बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। इसे यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था।

इस नक्शे की एक बड़ी खासियत है कि यह समुद्र में रास्ता तय करने और जहाजों के नेविगेशन के लिए बहुत उपयोगी है। लेकिन गोल धरती को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार अपने अनुपात से अलग नजर आने लगता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव का विरोध करते हुए अमेरिका ने कहा कि यह वैचारिक एजेंडे को बढ़ावा देता है और अंतरराष्ट्रीय शांति, समृद्धि या अच्छे संबंधों से जुड़ी असली समस्याओं से ध्यान भटकाता है। दूसरी तरफ मतदान से पहले टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि एक निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत निष्पक्ष मानचित्र से होती है।