पश्चिम एशिया में अमेरिका के रसूख को चुनौती देने मिस्र पहुंचे चिनफिंग, कई क्षेत्रों में सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर किए
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के मंगलवार को काहिरा पहुंचने पर मिस्र के राष्ट्रपति खुद उनका स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे।
HighLights
मिस्र के राष्ट्रपति ने एयरपोर्ट पर की चीन के राष्ट्रपति की अगवानी
दोनों पक्षों ने कई क्षेत्रों में सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर किए
न्यूयॉर्क टाइम्स, काहिरा। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के मंगलवार को काहिरा पहुंचने पर मिस्र के राष्ट्रपति खुद उनका स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे। इस मौके पर उनके स्वागत में आये बच्चों ने ऐसी टी-शर्ट पहनी थीं जिन पर चिनफिंग का चेहरा बना हुआ था।
इसके अलावा कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य पेश किया। मंगलवार शाम हुआ यह स्वागत चीन के लिए यह दिखाने का एक तरीका था कि मिस्र में उसका असर बढ़ गया है। जबकि मिस्र पारंपरिक रूप से अमेरिका का सुरक्षा सहयोगी रहा है।
एक दशक में चिनफिंग की मिस्र की यह उनकी पहली यात्रा थी। शी ने चीन और मिस्र को "करीबी भाई" बताया, जिनके बीच साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ने का साझा इतिहास है।
उन्होंने बीजिंग को पश्चिम से अलग तरह की ग्लोबल ताकत के तौर पर पेश करने की कोशिश की। इस सबसे यह अहसास हुआ कि वे इसे क्षेत्र में अमेरिकी रसूख को चुनौती दे रहे हैं।
उल्लखेनीय है मिस्र को हर साल अमेरिका से 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा की सैन्य मदद मिलती है, लेकिन अब वह चीन के भी करीब आ रहा है। दोनों देश व्यापार से आगे बढ़कर टेक्नोलाजी और सैन्य सहयोग के क्षेत्र में भी अपने रिश्ते बढ़ा रहे हैं।
तीन दिन की यात्रा पर आए शी ने बुधवार को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के साथ बातचीत की। ईरान के साथ युद्ध ने इलाके में बेचैनी पैदा कर रखी है।
एनर्जी मार्केट में उथल-पुथल मची है और पश्चिम एशिया में वाशिंगटन की भूमिका पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ द्वारा जारी बैठक के विवरण के अनुसार, दोनों पक्षों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, व्यापार और सप्लाई चेन, और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
चीन ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट की सुरक्षा और "टकराव की वजहों को खत्म करने" के लिए "सभी देशों" के साथ काम करने को तैयार है।
बैठक के विवरण के अनुसार, अमेरिका की ओर इशारा करते हुए शी ने "इलाके के बाहर की बड़ी ताकतों" से "दोहरे मापदंड छोड़ने" और क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने को कहा।
