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    लोगों पर जुल्म, मीडिया पर पाबंदी... PoJK में सख्ती के बाद दुनियाभर में हुई पाकिस्तान की थू-थू

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 03:48 PM (GMT+05:30)

    पाकिस्तान ने पीओजेके में मीडिया पर कड़ी पाबंदियां लगाई हैं, जिससे पत्रकारों को यात्रा और रिपोर्टिंग के लिए अनुमति लेनी पड़ रही है। ...और पढ़ें

    पीओजेके में पाकिस्तान का विरोध हुआ हिंसक।

    पीओजेके में पाकिस्तान का विरोध हुआ हिंसक।

    HighLights

    1. पीओजेके में पत्रकारों पर पाकिस्तान ने लगाई कड़ी पाबंदियां।

    2. अंतरराष्ट्रीय संगठनों, भारत ने प्रेस स्वतंत्रता पर चिंता जताई।

    3. कश्मीरी समुदाय ने भी यूके में विरोध प्रदर्शन किए।

    डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तान की बढ़ती सख्ती ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। कश्मीरी समुदाय के लोगों, मानवाधिकार समूहों और वैश्विक निगरानी संस्थाओं ने पत्रकारों पर पाबंदियों और मीडिया की आजादी को लेकर चिंता जताई है।

    गैर-कानूनी रूप से कब्जे वाली इस घाटी में तथाकथित विधानसभा चुनावों के दौरान शहबाज शरीफ सरकार द्वारा लागू किए गए इन कदमों की प्रेस की आजादी के लिए काम करने वाले संगठनों ने भी आलोचना की है।

    न्यूयॉर्क टाइम्स ने क्या कहा?

    द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पाकिस्तान ने कड़े नियम लागू किए हैं, जिनके तहत विदेशी मीडिया आउटलेट्स के लिए काम करने वाले पत्रकारों को इस्लामाबाद, कराची और लाहौर से बाहर यात्रा करने से पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी। ये पाबंदियां पीओजेके में विरोध प्रदर्शनों की बढ़ती मीडिया कवरेज के बीच लगाई गई हैं, जहां प्रदर्शनकारी जून की शुरुआत से ही ज्यादा राजनीतिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं।

    NYT की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन पाबंदियों से पाकिस्तान से होने वाली स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर बुरा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, "स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि इससे दुनिया के पांचवें सबसे ज्यादा आबादी वाले देश के बारे में स्वतंत्र पत्रकारिता का एक आखिरी जरिया भी बंद हो जाएगा।"

    'पाकिस्तान को आलोचना पसंद नहीं'

    पाकिस्तान ने विदेशी मीडिया संगठनों के लिए काम करने वाले पत्रकारों को पीओके से तुरंत चले जाने का आदेश भी दिया है। पाकिस्तान के प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने एक बयान में कहा, "देश के बड़े हिस्सों से रिपोर्टिंग करने के लिए पत्रकारों को सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत एक डरावना संदेश देती है कि आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को पसंद नहीं किया जाता है।"

    खबरें और भी

    PoK में हो रही घटनाओं की कवरेज करने वाले पत्रकारों पर खास तौर पर दबाव बढ़ा है। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) के अनुसार, 1 अगस्त को दो स्वतंत्र पाकिस्तानी पत्रकारों को हिरासत में लिया गया और किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया।

    खबरों के मुताबिक, कई अन्य पत्रकारों को एक ऐसे कानून के तहत अदालत में तलब किया गया है जो इस क्षेत्र से उनकी रिपोर्टिंग को लेकर गलत और फर्जी जानकारी फैलाने को अपराध मानता है।

    दुनिया भर में हो रही पाकिस्तान की थू-थू

    इन नई पाबंदियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना हुई है। ह्यूमन राइट्स वॉच की सीनियर एसोसिएट एशिया डायरेक्टर पेट्रीसिया गॉसमैन ने इन्हें देश में प्रेस की आजादी और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए सिकुड़ते दायरे में एक चिंताजनक कदम बताया है।

    रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 180 देशों में 153वें स्थान पर है। पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने भी शरीफ सरकार से पाबंदियां हटाने की अपील की। संगठन ने कहा, "अगर सरकार सच में यह दिखाना चाहती है कि वह लोकतंत्र और प्रेस की आजादी में यकीन रखती है तो उसे तुरंत यह पाबंदी हटा लेनी चाहिए।"

    हालांकि, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि विदेशी मीडिया संगठन सामान्य रूप से काम करते रहेंगे और सरकार यात्रा परमिट जारी करने के लिए एक नई व्यवस्था पर काम कर रही है।

    माना जा रहा है कि इन पाबंदियों का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से होने वाली रिपोर्टिंग पर पड़ेगा, जहां चुनाव प्रक्रिया 10 अगस्त को पूरी होनी है। इस इलाके में संवैधानिक सुधारों की मांग को लेकर महीनों से विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर हिंसा का आरोप लगाते हैं, जबकि प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाते हैं।

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों और स्वतंत्र अनुमानों के मुताबिक जून और जुलाई के दौरान हुई झड़पों में कम से कम 30 लोग मारे गए, जिनमें प्रदर्शनकारी, सुरक्षाकर्मी और आम लोग शामिल थे।

    इस बीच भारत ने भी पीओके में पाकिस्तान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने वहां हुए स्थानीय चुनावों को पूरी तरह से दिखावा करार दिया।

    विदेश मंत्रालय ने हिंसा, बिजली कटौती, डराने-धमकाने और आम नागरिकों के दमन की स्थिति पर भी चिंता जताई। विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी यूके में जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए लोगों ने ब्रैडफोर्ड की सड़कों पर उतरकर पीओके में पाकिस्तान की कार्रवाई की निंदा की।

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