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ब्रिटेन में काशी-हरिद्वार जैसा नजारा, लंदन की टेम्स नदी के किनारे पहली बार हुई गंगा आरती

Published: Mon, 14 Sep 2026 11:54 AM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 12:25 PM (IST)

लंदन में टेम्स नदी के किनारे पहली बार गंगा आरती का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।

टेम्स के किनारे दिखा काशी और हरिद्वार जैसा नजारा।

टेम्स के किनारे दिखा काशी और हरिद्वार जैसा नजारा।

HighLights

  1. लंदन में टेम्स नदी पर पहली बार गंगा आरती हुई।

  2. चिन्मय मिशन यूके ने टोटली थेम्स फेस्टिवल के साथ आयोजित किया।

  3. यह समारोह प्रकृति और ज्ञान के प्रति आभार व्यक्त करता है।

डिजिटल डेस्क, लंदन। लंदन में रविवार को टेम्स नदी के किनारे पहली बार गंगा आरती हुई। यह रोशनी और आभार व्यक्त करने का एक समारोह था, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।

चिन्मय मिशन यूके ने सालाना टोटली टेम्स फेस्टिवल के साथ मिलकर टेम्स पर गंगा आरती: रोशनी का समारोह आयोजित किया। यह कार्यक्रम संस्था के 75 साल पूरे होने के वैश्विक जश्न का हिस्सा था।

आयोजकों ने क्या कहा?

भारत में गंगा नदी के किनारे होने वाली विश्व-प्रसिद्ध आरती की भावना को दोहराते हुए लंदन में आयोजित इस कार्यक्रम को प्रकृति, ज्ञान और चेतना के जीवन-दायिनी प्रवाह के प्रतीक के रूप में आयोजित किया गया था। चिन्मय मिशन यूके की रेजिडेंट टीचर ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा, "पीढ़ियों से समुदाय गंगा के किनारे इकट्ठा होकर नदी, प्रकृति और जीवन को बनाए रखने वाली हर चीज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए रोशनी अर्पित करते रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "टेम्स पर होने वाली गंगा आरती भी उसी भावना को आगे बढ़ाती है और लोगों को आभार, उम्मीद और एकता के साझा पल में एक साथ लाती है।" चैतन्य ने बताया कि चिन्मय मिशन के लिए गंगा नदी ज्ञान के प्रवाह का भी प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "हमारे संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने अपना जीवन वेदांत के शाश्वत ज्ञान को हिमालय से लोगों के रोजमर्रा के जीवन तक पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया। जब हम चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं तो यह कार्यक्रम उस विरासत का भी जश्न है। ज्ञान, सेवा और सीमाओं से परे बहने वाले आभार की विरासत।"

'मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका'

चिन्मय मिशन के एक प्रवक्ता ने कहा, "प्रकृति के प्रति सम्मान गंगा आरती का केवल एक अतिरिक्त विषय नहीं है। यह समारोह ही मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका है, जिन्हें हिंदू परंपरा में पवित्र, जीवन देने वाली और जीवन को बनाए रखने वाली माना जाता है।"

टेम्स के किनारे हुई यह आरती पूरी तरह से जमीन पर आयोजित की गई थी। समारोह की कोई भी चीज टेम्स नदी में नहीं डाली गई, न ही बहाई गई और न ही छोड़ी गई। प्रवक्ता ने कहा, "पारंपरिक दीपों को पानी में बहाने के बजाय नदी के किनारे ही रखा जाएगा, ताकि हम परंपरा का सम्मान भी कर सकें और टेम्स नदी को कोई नुकसान न पहुंचे। यही सिद्धांत पूरे कार्यक्रम में लागू होगा।"

इसका मकसद ब्रिटिश हिंदू और दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए एक बड़े उत्सव का आयोजन करना और सभी बैकग्राउंड के लोगों को प्रकृति के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त करने के लिए एक साथ लाना था।

क्या है चिन्मय मिशन?

चिन्मय मिशन एक ग्लोबल मूवमेंट है, जिसकी स्थापना 1951 में हुई थी। यह आंतरिक बदलाव और आध्यात्मिक जागृति के लिए समर्पित है, जो वेदांत के शाश्वत ज्ञान पर आधारित है और पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद के विजन से प्रेरित है।

आज मिशन के दुनिया भर में 350 से ज्यादा केंद्र हैं, जो आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और सेवा कार्यों के जरिए समुदायों की मदद करते हैं। यूके में चिन्मय मिशन यूके जीवन के हर पड़ाव के लिए कार्यक्रम चलाता है: बच्चों और किशोरों से लेकर युवाओं, परिवारों और बुज़ुर्गों तक।

एक ट्रस्ट द्वारा आयोजित टोटली टेम्स (Totally Thames) 1997 से टेम्स नदी के सम्मान में कला कार्यक्रमों, पर्यावरण से जुड़े कामों, विरासत और शिक्षा कार्यक्रमों के जरिए मनाया जाने वाला एक उत्सव है। इस साल इसके कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर आयोजित पहली गंगा आरती के सभी टिकट बिक गए थे और उम्मीद है कि अब यह हर साल होने वाला एक नियमित कार्यक्रम बन जाएगा।

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