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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 07, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब 24 घंटे के भीतर साइट पर होगी FIR की एक कॉपी, SC का निर्देश

By JP YadavEdited By:
Updated: Thu, 08 Sep 2016 07:40 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थाने में रजिस्टर हुई FIR की एक कॉपी को 24 घंटे के भीतर वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए राज्यों के अधिकारियों को आदेश दिया है।

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नई दिल्ली (जेएनएन)। देशभर में पुलिस सिस्टम में सुधार को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने पुलिस थाने में रजिस्टर हुई FIR की एक कॉपी को 24 घंटे के भीतर वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को आदेश दिया है।

अपने अहम आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी तकनीकी कारण से दिक्कत आती है तो FIR को 48 घंटे में अपलोड की जाए, लेकिन इसे अपलोड करना जरूरी है। साथ ही कोर्ट ने इस मामले से महिलाओं के साथ यौन शौषण, बच्चों के यौन शोषण यानी पोक्सो, आतंकवाद और विद्रोह जैसे संवेदनशील मामलों में छूट दी है।

पुलिस सुधार संबंधी नई अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट नहीं करेगा सुनवाई

कोर्ट ने कहा कि इन मामलों में FIR अपलोड करने इतना ज्यादा जरूरत नहीं है। लिहाजा FIR अपलोड नहीं भी होती तो कोई दिक्कत नहीं, लेकिन सिक्किम, मिजोरम, मेघालय और कश्मीर जैसे राज्यों की भौगोलिक हालात पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने वहां 72 घंटे में अपलोड करने का समय तय किया है।

कोर्ट ने कहा कि कौन सा अपराध संवदेनशील है और FIR अपलोड नहीं होनी चाहिए। ये केवल डीएसपी या डीएम ही तय करेगा। कोर्ट ने आगे कहा कि सीआरपीसी के मुताबिक, सभी FIR इलाके के न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी भेजी जाएं।

बता दें कोर्ट द्वारा सभी राज्यों को 15 नवंबर से आठ हफ्ते के भीतर आदेश का पालन करने को कहा गया है। कोर्ट के आदेशों को सभी राज्यों के गृह सचिवों और डीजीपी को भेजा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर FIR अपलोड नहीं हुई तो इसके आधार पर कोई आरोपी अग्रिम जमानत नहीं ले सकता है।

यहां पर याद दिला दें कि पुलिस सुधार से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल सुनिश्चित करने के लिए रिटायर्ड जस्टिस के.टी. थॉमस की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति गठित की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने करीब डेढ़ सदी पुराने भारतीय पुलिस कानून में बदलाव नहीं होने से उत्पन्न समस्याओं और विसंगितयों को दूर करने के लिए सितम्बर 2006 में केन्द्र और राज्य सरकारों को विस्तृत निर्देश दिए थे, लेकिन इनके अमल की दिशा में ठोस काम नहीं हुआ है।