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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 14, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ममता का विरोध

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Updated: Sun, 14 Dec 2014 05:59 AM (IST)

किसी भी राजनीतिक दल के नेता या मंत्री की गिरफ्तारी होती है तो उस दल को लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिवाद

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किसी भी राजनीतिक दल के नेता या मंत्री की गिरफ्तारी होती है तो उस दल को लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिवाद करने का अधिकार है लेकिन प्रतिवाद करने वाले दल के लिए नैतिकता के आधार पर यह देखना भी जरूरी है कि उनके नेता या मंत्री को किस अपराध में गिरफ्तार किया गया है। यदि कोई नेता या मंत्री किसी मामले में पहले ही जनता की नजर में गिर गया है तो उनका पक्ष लेने या उसके समर्थन में खड़े होने पर सवाल उठना लाजिमी है। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिस तरह से खेल व परिवहन मंत्री मदन मित्रा की गिरफ्तारी का विरोध करने सड़क पर उतर गई हैं, उसपर सवाल खड़ा हुआ है। सारधा घोटाले की जांच के दौरान सीबीआइ ने जब परिवहन मंत्री को तलब किया तो वे पूछताछ से बचने के लिए जिस तरह कुछ दिनों तक बीमारी का बहाना बनाकर टालमटोल करते रहे, उससे उनपर संदेह और गहराया। आम जनता की नजर में वह पहले ही अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं। अंत में जब वह सीबीआइ कार्यालय गए तो घंटों पूछताछ करने के बाद सीबीआइ ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सीबीआइ ने जब एक कैबिनेट मंत्री को गिरफ्तार किया है तो नि:संदेह उसके पास इसका पुख्ता आधार होगा। बिना सबूत के सीबीआइ मुख्यमंत्री के करीबी मदन मित्रा को गिरफ्तार करने का जोखिम नहीं उठा सकती। कानून अपने तरीके से चलता है और उसकी नजर में सभी एक समान है। कानूनी प्रक्रिया के तहत ही मदन मित्रा को सीबीआइ ने तलब किया और गिरफ्तार किया गया।

ममता ने सीबीआइ के कार्यक्षेत्र पर सवाल उठाते हुए व मंत्री की गिरफ्तारी में सामान्य शिष्टाचार नहीं बरतने का जो आरोप लगाया है, वह तर्कसंगत नहीं है। मंत्री की गिरफ्तारी को ममता ने जिस तरह अन्यायपूर्ण, अनैतिक और असंवैधानिक करार दिया, वह भी उचित नहीं है। उन्होंने राजनीतिक उद्देश्य से भाजपा के निर्देश पर मदन को गिरफ्तारी का जो आरोप लगाया है, वह भी राजनीतिक बयानबाजी ही लगती है। संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक जांच एजेंसी को किसी जुर्म में मंत्री या किसी जन प्रतिनिधि को गिरफ्तार करने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि शिष्टाचारवश राज्य के मंत्री व विधायक को गिरफ्तार करने पर जांच एजेंसी को 24 घंटे के अंदर विधानसभा अध्यक्ष को सूचित करना पड़ता है। मदन मित्रा की गिरफ्तारी के मामले में सीबीआइ ने निर्धारित समय सीमा के अंदर विधानसभा अध्यक्ष विमान बंद्योपाध्याय को सूचित किया और घटना की विस्तृत जानकारी दी है।

ममता ने न सिर्फ मदन मित्रा की गिरफ्तारी के औचित्य पर सवाल उठाया है बल्कि उन्होंने सड़क पर उतरकर खुलेआम विरोध जताया है। उन्होंने मंत्री की गिरफ्तारी के विरोध में लगातार आंदोलन व धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इससे अब ममता की विश्वसनीयता पर भी संदेह पैदा होता है।

[स्थानीय संपादकीय: पश्चिम बंगाल]