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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 15, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ममता पर सख्त वामो

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Updated: Mon, 15 Dec 2014 05:58 AM (IST)

बंगाल में सबसे अधिक 34 वषरें तक शासन करने वाला वाममोर्चा अपनी पुरानी राह पर है। साम्राज्यवाद, सांप्र

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बंगाल में सबसे अधिक 34 वषरें तक शासन करने वाला वाममोर्चा अपनी पुरानी राह पर है। साम्राज्यवाद, सांप्रदायिकता व ज्वलंत मुद्दों पर उसका आंदोलन चलता रहा है। सारधा कांड के दोषियों को गिरफ्तार करने व जमाकर्ताओं का रुपया वापस लौटाने की मांग पर भी वामपंथी दल मुखर रहे हैं। इसी क्रम में सारधा कांड में परिवहन मंत्री मदन मित्रा की गिरफ्तारी पर कोलकाता समेत राज्यभर में धरना-प्रदर्शन व जुलूस निकालने का दौर शुरू हुआ है। अपने मंत्री की गिरफ्तारी के विरोध में खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सड़क पर उतर गई हैं। उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने राज्य व्यापी प्रदर्शन शुरू किया है। ऐसे में वाममोर्चा कैसे पीछे रह सकता है। वाममोर्चा की अगुवाई करने वाली माकपा ने सारधा कांड में मदन मित्रा की गिरफ्तारी पर संतोष जताया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी सीबीआइ पूछताछ करने की मांग की है। इसके लिए कामरेड भी सड़क पर उतर गए हैं। पूछताछ करने का तो यही अर्थ है कि मुख्यमंत्री को भी गिरफ्तार किया जाए। वैसे माकपा सारधा कांड पर मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग चुकी है लेकिन सभी जानते हैं कि नैतिकता के आधार पर आज कोई इस्तीफा देने वाला नहीं है इसलिए मुख्यमंत्री से पूछताछ की मांग पर वामपंथी दलों के सड़क पर उतरकर नारेबाजी करना इस्तीफा मांगने से कहीं ज्यादा अहम है।

विपक्ष के नेता सूर्यकांत मिश्रा का कहना है कि पहली बार सारधा कांड में राज्य के एक मंत्री की गिरफ्तारी हुई है। इससे बंगाल का सिर शर्म से झुक गया है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी परिवहन मंत्री की गिरफ्तारी का विरोध कर रही है। दूसरों पर बंगाल की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा रही हैं। बंगाल की गरिमा को किसी ने ठेस पहुंचाया है तो वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही हैं। मुख्यमंत्री ने बंगाल को कलंकित किया है। मिश्रा ने ममता द्वारा भाजपा को चुनौती देने पर भी सवाल उठाया और कहा है कि उनकी चुनौती भाजपा के लिए नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट और संविधान के लिए है। उन्होंने भाजपा से लड़ने के लिए ममता के वामपंथी दलों के साथ आने के प्रस्ताव को भी सिरे से खारिज कर दिया और कहा है कि सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने में माकपा सक्षम है। ममता ने मदन मित्रा की गिरफ्तारी पर जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर करारा प्रहार किया है, उससे भी कामरेड सहमत नहीं हैं। ममता ने केंद्र व सीबीआइ को खुली चुनौती देकर राज्य की जनता की सहानुभूति लूटने की जो कोशिश की है, उसमें वह सफल होंगी, इसमें संदेह है इसलिए कि भाजपा के घोर विरोधी वामपंथी दलों में इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है।

[स्थानीय संपादकीय: पश्चिम बंगाल]