यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 22, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आप कार्यकर्ताओं ने दिखाई अराजकता, महिला पत्रकारों से की बदसलूकी
दिल्ली पुलिस के कुछ अफसरों के निलंबन की मांग को लेकर धरने पर बैठे आम आदमी पार्टी (आप) कार्यकर्ताओं ने दूसरे ही दिन अराजकता का खुला प्रदर्शन किया। शायद ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। दिल्ली पुलिस के कुछ अफसरों के निलंबन की मांग को लेकर धरने पर बैठे आम आदमी पार्टी (आप) कार्यकर्ताओं ने दूसरे ही दिन अराजकता का खुला प्रदर्शन किया। शायद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सोमवार को खुद को अराजक घोषित करने का ही असर था कि उनकी सेना पूरी शिद्दत से उन्हें सही साबित करने में जुट गई।
कभी मीडिया की सुर्खियों से उपजी आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को आईना दिखाने वाला मीडिया ही अखरने लगा। केजरीवाल ने मीडिया पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होने के गंभीर आरोप लगाए, तो उनकी पार्टी के कार्यकर्ता उस पर सीधे हमले में जुट गए। इसे सत्ता में आने के बाद हालात न संभलने की खिसियाहट कहें या फिर धरने पर चौतरफा हुई तीखी प्रतिक्रिया से पैदा झुंझलाहट, केजरीवाल और उनकी टीम आपे से बाहर होती गई। जिस मीडिया ने भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया और केजरीवाल के मिशन को आवाज दी, उनको वही मीडिया पक्षपाती नजर आने लगा। उन्होंने पहले तो कहा, 'हां मैं अराजक हूं।' इसके बाद आंदोलन के समय और मुद्दे पर जब सवाल पूछे गए, तो वह भड़क गए। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आधा मीडिया कांग्रेस, तो आधा भाजपा के पक्ष में है। केजरीवाल का यह कहना भर था कि आप कार्यकर्ता मीडिया के खिलाफ विषवमन में जुट गए। कुछ चैनलों ने जब दिल्ली में अराजकता से हो रही परेशानी पर लोगों से सवाल पूछने शुरू किए तो उन्हीं के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी गई। विडंबना तो यह रही कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर हो रहे धरने में महिला पत्रकारों तक को नहीं बख्शा गया। जुमले और फब्तियां तो दूर महिला पत्रकार व कैमरामेन के साथ धक्का-मुक्की भी की गई।
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