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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 05, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जाट आंदोलन: सख्त हुई हरियाणा सरकार, नहीं बख्शे जाएंगे उपद्रवी

By Rajesh KumarEdited By:
Updated: Sun, 05 Jun 2016 09:22 AM (IST)

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान कोई बड़ा हादसा ना हो इसके लिए प्रशासन की तरफ से पूरी मुश्तैदी की गई है और अर्धसैनिक बलों की 55 कंपनियां बुला ली गई है।

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चंडीगढ़। जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर इस बार सरकार किसी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि जाट आरक्षण आंदोलन पर अड़े जाट आरक्षण संघर्ष समति के अध्यक्ष यशपाल मलिक गुट की धमकी के बाद हरियाणा सरकार ने उपद्रवियों से निपटने और इस दौरान लोगों को किसी तरह की परेशानी ना हो इसके लिए पूरी तरह तैयार है।

नहीं बख्शे जाएंगे उपद्रवी


हरियाणा के गृह विभाग में तैनात एडिशनल चीफ सेक्रेटरी राम निवास ने बताया कि अर्धसैनिक बलों की 55 कंपनियों को तैनात कर दिया गया है। वहां पर सुरक्षा के लिहाज से सीआरपीएफ, आरएएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ की इन कंपनियों को वहां के सभी संवेदनशील मोर्चों पर लगाया जा चुका है।

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सभी जिलों में धारा 144 लागू

राम निवास के मुताबिक, प्रशासन की तरफ से ऐसा निर्देश दिया गया है कि जहां कहीं भी प्रदर्शन हो बिना किसी इजाजत के फौरन उस पर कार्रवाई की जाए। राज्य के सभी जिलों में धारा 144 लगा दी गई है। खासकर, जहां से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे की पटरियां गुजर रही है वहां के दोनों तरफ के एक किलोमीटर के दायरे में धारा 144 लागू रहेगी। ऐसा फैसला इसलिए लिया गया है ताकि कोई प्रदर्शन के दौरान सड़क और रेल पटरियों को निशाना ना बना सके।

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राम निवास के मुताबिक, पिछली बार जाट आंदोलन के दौरान जो वाकया हुआ था वैसा इस बार ना हो इसके लिए ग्राम पंचायत और खाप पंचायतों ने इस बात का आश्वासन दिया है कि वो कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में सरकार का पूरी तरह से सहयोग करेंगे।

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18 जगहों पर आंदोलन शुरू होने की आशंका

हिंसा की आशंका वाले रोहतक, झज्जर, सोनीपत, कैथल, हिसार, जींद, भिवानी और सिरसा व फतेहाबाद में सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। प्रदेश में दंगा आशंकित इलाकों में अर्धसैनिक बलों की ओर से नाकेबंदी कर दी गई है। पूरे प्रदेश में 18 जगहों पर रविवार को आंदोलन शुरू होने की आशंका है। उधर, जाट महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश मान ने कहा है कि सरकार हमारी बात मानने को तैयार है। इसलिए हम आंदोलन में भागीदारी नहीं कर रहे और काम पूरा करने के लिए सरकार को एक पखवाड़े का समय दिया गया है।