विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 21, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कैबिनेट बैठकों से पहले और बाद में सोनिया से मिलते थे राव

By Gunateet OjhaEdited By:
Updated: Thu, 21 Jul 2016 07:28 PM (IST)

कैबिनेट की बैठकों से पहले और बाद में राव सोनिया से मिलने जाया करते थे। मंत्रिमंडल के विस्तार और विदेशी दौरों पर परामर्श लेते थे।

News Article Hero Image

हैदराबाद, प्रेट्र। पीवी नरसिम्हा राव द्वारा आर्थिक सुधार शुरू करने के 25 साल पूरे होने के मौके पर उनके पोते को इसका मलाल है कि कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री के योगदान को स्वीकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने इस बात से इन्कार किया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राव के संबंधों में किसी तरह की तल्खी थी।

एक विशेष भेंट में एनवी सुभाष ने कहा कि कुछ हलकों में जो कहा जा रहा है कि सोनिया और राव के संबंध अच्छे नहीं थे, यह गलत है। दोनों नेताओं के संबंध बहुत अच्छे थे। कैबिनेट की बैठकों से पहले और बाद में राव सोनिया से मिलने जाया करते थे। मंत्रिमंडल के विस्तार और विदेशी दौरों पर परामर्श लेते थे। चुनावों से पहले उनकी पसंद के उम्मीदवार के बारे में भी पूछते थे। एक प्रधानमंत्री इससे ज्यादा और क्या कर सकता है?

सुभाष ने कहा कि सोनिया के परिवार को एसपीजी की सुरक्षा मिली हुई थी। राजीव गांधी फाउंडेशन को सरकार से धन राशि मिलती थी। राव खुद उनके परिवार का खयाल रखते थे। हालांकि, कई लोगों को लगता था कि यदि राव पांच साल तक पीएम रह गए, तो लोग नेहरू-गांधी परिवार को भूल जाएंगे। अपने फायदे के लिए उन्होंने सोनिया के कान भरने शुरू किए। लेकिन मुझे नहीं लगता कि राव के मन में कोई द्वेष था। आखिरकार, सोनिया के पति राव के नेता रहे थे। उनको कुछ सम्मान तो देना ही था।

किताब में दावा, नरसिम्हा राव-सोनिया के बीच रिश्ते नहीं थे सहज

नरसिम्हा राव देना चाहते थे नेताजी को मरणोपरांत 'भारत रत्न'