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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नोट पर बैन: विपक्ष ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, कहा- 'ये तो तानाशाही है'

By Lalit RaiEdited By:
Updated: Thu, 10 Nov 2016 03:10 PM (IST)

500-1000 रुपए के नोट पर अब सियासत शुरू हो चुकी है। विपक्षी दलों ने कहा कि लोकप्रियता हासिल करने के लिए मोदी सरकार ने इस तरह का फैसला लिया है।

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नई दिल्ली (जेएनएन)। पांच सौ और एक हजार के नोट पर पाबंदी लगाए जाने के बाद आज बैंक खुले। ये सच है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन आम लोगों की दुहाई देकर कुछ लोग सुप्रीमकोर्ट और हाइकोर्ट पहुंचे तो राजनेता भी मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ खुलकर बोले। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि ये तो अघोषित आपातकाल है, तो कांग्रेस ने इसे तानाशाही करार दिया। इन सबके बीच सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि अगर किसी ने काले धन के खिलाफ लड़ाई लड़ी है तो वो सिर्फ समाजवादी पार्टी है। आप को सिलसिले वार बताते हैं कि कोर्ट से लेकर राजनीति के मैदान में क्या हुआ ।

सुप्रीम कोर्ट में PIL, केंद्र ने दाखिल की कैविएट

पांच सौ और 1000 रुपए के नोट पर पाबंदी लगाने के विरोध में पीआईएल पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस सिलसिले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर कहा कि बिना केंद्र का पक्ष अदालत फैसला न सुनाए। अब इस मामले में अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा याचिका दायर करने की प्रक्रिया पूरी करें, उसके बाद ही सुनवाई की जाएगी। दो हजार रुपए के नोट को अमल में लाए जाने पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ये आम लोगों की सुविधा के लिए है।

नोट पर बैन के खिलाफ याचिका खारिज

मद्रास हाइकोर्ट ने 500-1000 के नोट पर बैन के खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि ये देश के लिए बेहतर कदम है।

अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि याचिककर्ता को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने से बचना चाहिए।

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कांग्रेस ने साधा निशाना

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस काले धन के मुद्दे पर हमेशा लड़ाई लड़ती रही है। लेकिन मोदी सरकार ने जिस तरह से ऐलान किया वो किसी तानाशाही से कम नहीं है। सरकार के इस फैसले से शादी विवाह करने वाले लोगों के साथ-साथ किसानों पर असर पड़ेगा। पिछले दो साल से केंद्र सरकार तानाशाही अंदाज में काम करती रही है।

मायावती ने साधा निशाना

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि ये एक अघोषित आर्थिक आपातकाल है। इस फैसले से साफ है कि मोदी सरकार की नीयत में खोट है। केंद्र सरकार ने सिर्फ उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर फैसला किया है। मायावती ने कहा कि आम लोग परेशान हो रहे हैं लेकिन मोदी सरकार को इससे लेना-देना नहीं है।

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सपा के निशाने पर पीएम

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि राम मनोहर लोहिया के बाद अगर किसी ने लड़ाई लड़ी है तो वो सिर्फ समाजवादी पार्टी है। केंद्र सरकार के इस फैसले से आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हम खुद चाहते हैं देश के विकास में काला धन रुकावट है, इसके खिलाफ मुहिम चलाया जाना चाहिेए। लेकिन सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए आम लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान इन नोटों पर पाबंदी लगाने के वादे किए थे,लिहाजा उन पर इस तरह का फैसला करने का दबाव था। जनदबाव में मोदी ने फैसला किया लेकिन अब अराजकता फैल गई है।

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