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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 22, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रेप से हुई प्रेग्‍नेंट, एबनॉर्मल भ्रूण के लिए कोर्ट से मांग रही गर्भपात की अनुमति

By Monika minalEdited By:
Published: Fri, 22 Jul 2016 01:13 PM (IST)Updated: Fri, 22 Jul 2016 04:05 PM (IST)

पूर्व मंगेतर द्वारा रेप किए जाने से प्रेग्‍नेंट महिला को जब पता चला कि उसके कोख में 24 हफ्ते से ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। सोनल (बदला हुआ नाम) की स्थिति ने भारत के पुराने गर्भपात कानून पर से पर्दा हटा दिया है, उसने उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण जगायी है जो एबनॉर्मल बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होती हैं।

सोनल न केवल रेप पीड़िता होने का दर्द भुगत रहीं बल्कि अब वे इस बात से भी दर्द में जी रही हैं कि उनकी गर्भ में पल रहा 24 हफ्ते का भ्रूण एबनॉर्मल है। यानि वे एबनॉर्मल बच्चे को जन्म देने वाली हैं जिसमें मानसिक और शारीरिक रूप से कमियां होंगी।

दिमाग संबंधित एनेन्सेफैली बीमारी से ग्रस्त 24 हफ्ते का भ्रूण ऐसे बच्चे के रूप में आएगा जिसकी दिमागी क्षमता विकसित नहीं होगी यह जान सोनल सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात कराने की अनुमति मांग रही हैं।

भारत के 45 वर्ष पुराने गर्भपात कानून के अनुसार केवल 20 हफ्ते के भ्रूण को ही हटाया जा सकता है। सोनल को अपने कोख में पल रहे बच्चे के बारे में देर से पता चला। जब डॉक्टर ने इस बीमारी के बारे में बताया तो उसने गर्भपात का अनुरोध किया लेकिन डॉक्टरों ने इसे ठुकरा दिया क्योंकि भ्रूण 20 हफ्ते से अधिक का हो गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों को देखें तो भारत में हर वर्ष करीब 26 मिलियन बच्चों का जन्म होता है जिनमें से 2-3 फीसद गंभीर बीमारी का शिकार होते हैं।

इस कानून के कारण सोनल के साथ दो अन्य पीड़ित महिला व एक डॉक्टर, निखिल दातार ने कानून की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे, ‘तर्कहीन, असंवैधानिक और रुढ़िवादी’ बताया है। वे गर्भपात की समय सीमा को बढ़ाकर 26 से 28 हफ्ते करना चाहते हैं।

सोनल चाहती है कि केंद्र की ओर से अस्पतालों में डॉक्टरों का एक्सपर्ट पैनल बनाने के साथ उसे प्रेग्नेंसी के लिए मेडिकल टर्मिनेशन का निर्देश दिया जाए।

रेप पीड़िता सोनल ने अपनी याचिका पर केंद्र एवं महाराष्ट्र सरकार से 24 घंटे के भीतर प्रतिक्रिया मांगी है। याचिका में कानून के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है जो गर्भधारण के 20 सप्ताह बाद गर्भपात कराने पर रोक लगाते हैं, भले ही मां और उसके भ्रूण को जीवन का खतरा ही क्यों न हो।

उसका आरोप है कि उसके पूर्व मंगेतर ने उससे शादी का झूठा वादा करके उसका रेप किया था और वह गर्भवती हो गई।

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