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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 19, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    सीरिया में मारे गए लोगों का आंकड़ा सुनकर चौंक जाएंगे !

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Tue, 19 Jul 2016 10:11 PM (IST)

    सीरिया पर लगातार बरस रहे बमों में अब तक कितने लोगों ने अपनी जान गंवाई है इसका आंकड़ा यदि आप जान गए तो चौंक जाएंगे। ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली (कमल कान्त वर्मा)। सीरिया में छिड़े गृहयुद्ध के दौरान पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 2,80,000 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा सीरियन ऑब्जरवेटरी ऑफ ह्यूमन राइट्स (SOHR) का है। एसओएचआर की एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2014 से लेकर दिसंबर 2015 तक सीरिया के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 42234 हवाई हमले हुए। इस दौरान सीरिया की जमीन पर 22370 बम बरसाए गए।

    यूएन की लिस्ट में चार करोड़ से अधिक पंजीकृत शरणार्थी

    यहां पर छिड़ेे गृहयुद्ध में अब तक लाखों की तादाद में बच्चे अनाथ हुए हैं। हजारों की संख्या में सीरियाई नागरिकों ने दूसरे देेशों का रुख किया है। सीरियाई नागरिकों के पलायन को लेकर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट चौंकाने वाले खुलासे करती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक करीब 4,819,828 पंजीकृत सीरियाई शरणार्थी विभिन्न देशों में शरण लिए हुए हैं। इसमें मिस्र, जोर्डन और लेबनान के अलावा तुर्की शामिल हैं। इसके अलावा करीब 29000 शरणार्थी उत्तरी अफ्रीका के देशोंं में भी मौजूद हैं।

    एक करोड़ से अधिक शरणार्थियों की मंंजिल यूरोप

    यूएन की रिपोर्ट यह भी बताती है कि अप्रैैल 2011 से लेकर मई 2016 तक करीब 1,066,844 शरणार्थियों ने यूरोप में पनाह लेने के लिए अर्जी लगाई है। लेकिन वर्ष 2014 तक महज 137,798 सीरियाई शरणार्थियों को ही यूरोप में शरण दी गई है। इन शरणार्थियों को शरण देने वाले देशों में सबसे आगे जर्मनी और सर्विया हैं। इसके अलावा स्वीडन, हंगरी, आस्ट्रिया, नीदरलैड और फिर डेनमार्क भी शामिल है।

    सीरिया में मारे गए लोगों का आंकड़ा सुनकर चौंक जाएंगे !

    खंडहर में तब्दील 80 फीसद इमारतें

    आज यहां की करीब 80 फीसद इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैंं। सही मायने में यह खंडहरों का देश लगता है जहां टूटी हुई इमारतों के अलावा कुछ और शेष नहीं रह गया है। कहीं कहीं पर कुछ लोग दिखाई जरूर देते हैं जो अपने आने वाले पल के लिए सकुशल रहने की महज दुआ ही मांगते नजर आते हैं।

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    वर्ष 2000 में शुरू हुआ सीरिया का बुरा दौर

    सीरिया में ऐसे हालात करीब 16 वर्षों से बने हुए हैं। वर्ष 2000 के बाद यहां की बदलती राजनीतिक समीकरणों ने यहां पर गृहयुद्ध की शुरुआत की। अपने ही राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ यहां के लोग एकजुट हो गए और असद के विद्रोहियों ने सरकार के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया। इसके बाद यहां पर लगातार सेना और विद्रोहियों के बीच गोलीबारी होती है। इसके बाद जो रही सही कसर थी वह आतंकी संगठन आईएसआईएस ने पूरी कर दी।

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    जिंदा रहेंगे या नहींं, कुछ पता नहीं

    यह आंकड़े सीरिया की तबाही का मंजर बयां करने के लिए काफी हैं। मौजूदा समय में आतंकी संगठन आईएसआईएस के खात्मे के नाम पर रूस और अमेरिकी फौज लगाातार बमबारी कर रही है। इनके निशाने पर आईएस के आतंकी होते हैं, लेकिन कई बार इनका निशाना चूक जाता है और मरने वालों में आम नागरिक शामिल हो जाते हैं। यही वजह है कि सीरियाई सरकार के विद्राेही और सीरिया की फौज के बीच के अलावा आईएस को लेकर मचे घमासान में कब किस नागरिक की जान चली जाएगी इसका पता किसी को नहीं रहता है। यहां के लोग मौत के साए में अपना एक-एक पल गुजारते हैं। वह यह नहीं जानते हैं कि आने वाला पल उनके लिए तबाही लेकर आएगा या वह जिंदा बच जाएंगे।

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